चंडीगढ़। पार्किंग घोटाला मामले में पाश्चात्य नाम से चल रही दूसरी कंपनी के निदेशक को चंडीगढ़ पुलिस को गिरफ्तार कर लिया है। पार्किंग का ठेका लेने के लिए फर्जी बैंक गारंटी देने के मामले में यह पांचवीं गिरफ्तारी है। सूत्रों के अनुसार इस घोटाले के तार कई लोगों से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आरोपी की पहचान नई दिल्ली निवासी विकास पांडे के रूप में हुई है। वह पाश्चात्य एंटरटेनमेंट पार्किंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक है। जांच में पता चला है कि एक नाम की दो कंपनियां बनाकर टैक्स चोरी व अन्य कई गड़बड़ियां की गई हैं, क्योंकि नगर निगम ने पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को शहर में पार्किंग चलाने का ठेका दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस पते पर यह कंपनी पंजीकृत हैं, उस पते पर करीब नौ अन्य कंपनियां भी पंजीकृत हैं। साथ ही विकास भी कई अन्य कंपनियों में किसी न किसी पद है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई अन्य गिरफ्तारियां भी संभव है, क्योंकि कंपनियों ने कई गड़बड़ियां की हुई हैं। इस मामले में पुलिस ने अब तक फर्जी बैंक गारंटी का मास्टरमाइंड अनिल शर्मा, पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय शर्मा, बैंक ऑफिसर रविचंद्र प्रकाश और अजय को गिरफ्तार किया है।
नगर निगम के किन अफसरों की मिलीभगत, इस पर निगम ने साधी चुप्पी
फर्जी बैंक गारंटी के मामले में पुलिस ने कंपनी और बेंच से जुड़े कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन नगर निगम के किन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत रही है, इस पर निगम ने चुप्पी साध ली है। निगम की विभागीय जांच भी चल रही है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। बता दें कि नगर निगम ने वर्ष 2020 में 57 पार्किंगों का ठेका पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। ठेकेदार को हर माह 45 लाख रुपये निगम को देना था। उसने लगभग डेढ़ साल तक रुपये जमा कराए और उसके बाद वह आनाकानी करने लगा। इस दौरान लाइसेंस फीस, जुर्माना और दोनों का ब्याज मिलाकर लगभग 7 करोड़ रुपये का बकाया हो गया। 23 जनवरी 2023 को कंपनी का ठेका समाप्त हो गया। उसके बाद निगम ने बकाया वसूलने के लिए बैंक को पत्र लिखा, तो बैंक की ओर से बताया गया कि उनकी ओर से बैंक गारंटी का कोई सत्यापन पत्र निगम को नहीं दिया गया है। जो निगम के पास बैंक गारंटी है, वो फर्जी है। इसके बाद मामला पुलिस के पास गया।