Parkash Singh Badal Passed Away: पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल का मंगलवार रात आठ बजे 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अस्पताल के मुताबिक उन्होंने मंगलवार रात करीब आठ बजे अंतिम सांस ली। बादल राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा चेहरा थे।
Parkash Singh Badal Passed Away: राष्ट्रीय राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का कद भुलाया नहीं जा सकता। बादल ने संकट के समय में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनने में सहयोग दिया। उस समय उन्होंने आठ अकाली और इनेलो के चार कुल 12 सांसदों का समर्थन अटल बिहारी वाजपेयी को दिया था। अकाली दल की भाजपा के साथ मजबूत रिश्तों की नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार के समय पड़ी थी।
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बात 1996 की है। लोकसभा चुनाव में उतरे 13 अकाली उम्मीदवारों में से आठ ने जीत हासिल की थी। इन अकाली सांसदों के साथ प्रकाश सिंह बादल दिल्ली स्थित पंजाब भवन पहुंचे थे। तब केंद्र में एचडी देवगौड़ा की अगुवाई में सरकार बनाने की कवायद चल रही थी।
इसकी जानकारी मिलने पर प्रकाश सिंह बादल ने अटल जी से मिलकर समर्थन देने का वादा किया। बादल जब पंजाब भवन लौटे तो अकाली नेताओं ने उनसे देवगौड़ा सरकार में शामिल होने का आग्रह किया। इस पर बादल ने स्पष्ट किया कि जिस सरकार को कांग्रेस का समर्थन होगा, अकाली उसमें शामिल नहीं होंगे।
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कृषि कानून बने भाजपा ने अलगाव का कारण
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के दौरान प्रकाश सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। बादल ने लिखा था यह यकीन करना बेहद कठिन है कि इतने भारी बहुमत वाली सरकार निर्णय लेने में नाकामयाबी को रोक नहीं पा रही है। इसके बाद अकाली दल और भाजपा के रिश्ते टूट गए और बादल की बहू हरसिमरत कौर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
देवीलाल ने निभाया पिता का फर्ज
प्रकाश सिंह बादल की बेटी की शादी आदेश प्रताप कैरो के साथ थी। उस समय बादल दक्षिण भारत की किसी जेल में बंद थे। उनके समर्थक उनके पास गए कि शादी के नाम पर पैरोल आसानी से मिल जाएगी। वे शादी में शामिल हो जाएं। उस समय बादल ने कहा था कि मेरे बड़े भाई देवीलाल हरियााण में हैं।
शादी की सभी रस्में मेरे स्थान पर वे निभाएंगे। तब देवीलाल ने बादल की बेटी का कन्यादान किया था। उप प्रधानमंत्री रहते हुए सभी प्रोटोकाल दरकिनार कर देवीलाल बादल से मिलने दक्षिण भारत गए थे।
मजीठिया को मंत्री बनाया
हरियाणा की राजनीत में एक किस्सा और मशहूर है। पंजाब में अकाली दल की सरकार बनी और प्रकाश सिंह बादल ने बिक्रम सिंह मजीठिया को मंत्री बनाने से इन्कार कर दिया। बादल को डर था कि पार्टी पर परिवारवाद के आरोप लगेंगे। उस समय मजीठिया के करीबी ओम प्रकाश चौटाला के पास आए और चौटाला ने मजीठिया को मंत्रिमंडल में शामिल करने की बात की। चौटाला की बात बादल भी नहीं टाल सके।