चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दुनिया के सबसे सुंदर फूल आर्किड की लुप्त होती प्रजातियों को टेस्ट ट्यूब से तैयार किया है। खास बात यह है कि इन प्रजातियों का फूल 6 से 12 साल के बजाय अब तीन से नौ माह में ही तैयार हो जाएगा। इस शोध से आर्किड के पुष्पों की संख्या में कई गुना वृद्धि होगी। साथ ही देशों की अर्थव्यवस्था भी इसके जरिए मजबूत होगी, क्योंकि इस पुष्प से देश करोड़ों डॉलर का कारोबार करते हैं।
तीन दशक से हो रहा था शोध
पीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. प्रोमिला पाठक आर्किड पर पिछले तीन दशक से शोध कर रही हैं। उनका सोचना था कि आर्किड के पुष्प जंगल आदि इलाकों में बहुत ढूंढने पर ही दिखते हैं। इसका एक पुष्प बनने में भी वर्षों लगते हैं। ऐसे में क्यों न टेस्ट ट्यूब के जरिए इसे तैयार किया जाए। उन्होंने पता लगाया कि आर्किड को सही तापमान के अलावा न्यूट्रीशियन चाहिए। उन्होंने देश व विदेशों से उन चीजों का मिश्रण तैयार किया और काम शुरू कर दिया। उन्होंने आर्किड की अरुनदिना बनबुसिफोलिया, मलेक्सिस एक्यूमिनाटा, मलेक्सिस मस्किफेरा, हेबिनारिया आदि प्रजातियां टेस्ट ट्यूब से तैयार करने के लिए दिन-रात काम किया और सफलता मिल गई। उन्होंने आर्किड के 150 पौधे तैयार कर दिए हैं। आर्किड के किसी भी हिस्से के जरिए टेस्ट ट्यूब अब तैयार हो सकेगा।
इन शोधार्थियों ने किया कई राज्यों के जंगलों व पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा
प्रो. प्रोमिला पाठक के साथ शोधार्थी बबीता, अंकुश, अनामिका, प्रतिभा, वैली आदि ने उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, शिलांग, नगालैंड, अंडमान निकोबार, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा किया। दुर्गम इलाकों में जाकर आर्किड के पौधे ढूंढकर उन पर अध्ययन किया। पता लगाया कि आर्किड को किन चीजों की आवश्यकता है। शोधार्थियों का कहना है कि एक क्षेत्र में बमुश्किल एक या दो ही आर्किड के पौधे मिलते हैं।
इन्होंने भी देखा था टेस्ट ट्यूब का सपना
बॉटनी विभाग के प्रसिद्ध वैज्ञानिक नडसन ने आर्किड को टेस्ट ट्यूब के जरिए तैयार करने का सपना देखा था। उन्होंने इस पर कुछ काम भी किया। उसके बाद वैज्ञानिक मोरल ने इस पर काम किया। अब पंजाब यूनिवर्सिटी ने इस पर काम किया और सफलता हासिल की। आर्किड पर प्रतिबंध लगा हुआ है, क्योंकि यह दुर्लभ प्लांट है। इसके लिए देश में कुछ जगहों पर आर्किड सेंचुरी बनी हुई हैं। थाईलैंड आदि से यह पुष्प भारत में आता है। इस पुष्प से हजारों सौंदर्य प्रसाधन तैयार होते हैं जो काफी महंगे होते हैं। पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था में यह पुष्प महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
सीता पुष्पा, द्रोपदी पुष्पा प्रजाति भी टेस्ट ट्यूब से तैयार की
वैज्ञानिकों की इस टीम ने वर्षों मेहनत कर आर्किड की प्रजाति सीता पुष्पा और द्रोपदी पुष्पा टेस्ट ट्यूब से तैयार की। यह दुर्लभ आर्किड है, जो ढूंढे से भी नहीं मिल रहे हैं। अब इनकी संख्या में टेस्ट ट्यूब के जरिए वृद्धि होगी। बताते हैं कि माता सीता व द्रोपदी अपने बालों की सजावट के लिए इन पुष्पों का प्रयोग करती थीं। उन्हीं के नाम पर यह प्रजातियां हैं।
आर्किड की लुप्त होती कई प्रजातियों को टेस्ट ट्यूब के जरिए तैयार किया गया है। इसके लिए वर्षों की मेहनत लगी। शोधार्थियों ने भी खूब मेहनत की। इस शोध से आर्किड के प्लांट अब छह से नौ माह में तैयार हो जाएंगे जबकि पहले 12 साल तक लग जाते थे। - प्रो. प्रोमिला पाठक, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़