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Chandigarh News: चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पास मैट्रो लाइन से जुड़ेंगे पंचकूला-जीरकपुर

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चंडीगढ़। ट्राइसिटी मैट्रो प्रोजेक्ट को लेकर राइटस (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड) ने वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और डीपीआर में कुछ नए सुझाव दिए हैं। इसके तहत चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पास मैट्रो लाइन की कॉरिडोर-2 से पंचकूला और जीरकपुर को जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर सभी हितधारकों ने सहमति जताई है। वहीं, पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ के परौल में राइटस को डिपो के लिए जमीन देने की संभावनाओं पर फिर से विचार करने की बात कही है। ट्राइसिटी में मेट्रो नेटवर्क स्थापित करने के लिए गठित यूएमटीए की बैठक मंगलवार को प्रशासक के कार्यकारी सलाहकार नितिन कुमार यादव की अध्यक्षता में यूटी सचिवालय में आयोजित की गई। इस दौरान राइटस द्वारा सुझाए गए नए बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई और सभी हितधारकों ने इन पर सहमति जताई। गौर हो कि ट्राइसिटी चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में मैट्रो के चरण-1 एमआरटीएस नेटवर्क के लिए राइटस को वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की तैयारी के लिए अध्ययन सौंपा गया है। राइटस ने बीते माह दिसंबर में यातायात और सिस्टम चयन रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। राइटस ने इस दौरान अध्ययन प्रगति, अध्ययन क्षेत्र और इसकी जनसंख्या, प्राथमिक सर्वेक्षण, यात्रा मांग मॉडल पर प्रमुख पहलुओं को शामिल किया है। इसके तहत इनपुट और संरचना, प्रस्तावित एमआरटीएस चरण- नेटवर्क, राइडरशिप अनुमान आदि पर चर्चा शामिल है। राइट्स ने प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर-1 के साथ रेलवे स्टेशन के पास संशोधित संरेखण और प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर-2 के माध्यम से जीरकपुर को पंचकूला से जोड़ने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक में सभी हितधारकों ने इन सुझाए गए संशोधनों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई। प्रशासक के सलाहकार ने कहा कि इस संबंध में औपचारिक पुष्टि यूएमटीए की अगली बैठक में की जाएगी। वहीं, निर्णय लिया गया कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की इच्छा के अनुसार शहरी नियोजन विभाग चंडीगढ़ शहर में ऊंची संरचनाओं के निर्माण की अनुमति नहीं देने के लिए विरासत पहलुओं के संबंध में प्रासंगिक अधिनियम, कानून आदि प्रस्तुत करेगा।
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मेट्रोलाइट के बजाय दो कोच मेट्रो सिस्टम पर विचार करने की सलाह
वहीं, 15 जनवरी को हुई बैठक के दौरान मंत्रालय ने ट्राइसिटी में प्रस्तावित एमआरटीएस नेटवर्क के लिए मेट्रोलाइट के बजाय दो कोच मेट्रो सिस्टम पर विचार करने की सलाह दी है। इस पर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के सभी हितधारकों ने सहमति जताई है। परौल के पास न्यू चंडीगढ़ में लगभग 21 हेक्टेयर डिपो की जमीन की पुष्टि के संबंध में पंजाब के अधिकारियों ने बताया कि यह जमीन डी-लिस्टेड पीएलपी लैंड (पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट) है। प्रस्तावित मेट्रो डिपो के लिए इस भूमि पार्सल को उपलब्ध कराने की संभावना पर फिर से जांच की जाएगी। वहीं, प्रशासक ने कहा कि अगर यह भूमि पार्सल उपलब्ध नहीं तो मेट्रो डिपो के लिए तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले एक वैकल्पिक भूमि पार्सल की पहचान की जाए और जल्द से जल्द चंडीगढ़ प्रशासन को सूचित करते हुए राइट्स को भी इसकी सूचना दी जाए् ताकि आगे का काम शुरू किया जा सके।
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