अबकी बार पंचकूला नगर निगम की बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा, एजेंडा होगा। मेयर से लेकर पार्षद तक नगर निगम की बैठक के एजेंडे के लिए गुस्से में हैं। एक स्वर में सभी का कहना है निगम की ओर से हाउस की मीटिंग तो बुलाई गई लेकिन न तो फाइनल एजेंडा तैयार करने के पहले कोई चर्चा की न ही एजेंडा पांच दिन पहले भेजा गया। नगर निगम की हाउस मीटिंग 25 अक्तूबर को है और अब तक एजेंडा पार्षदों के पास नहीं आया है।
पंचकूला नगर निगम में चल रही अंदरूनी कलह अब सिटी का विकास बाधित कर सकती है। पांच माह बाद होने वाली निगम की बैठक में अबकी बार विकास कार्यों पर चर्चा की जानी थी। पार्षदों में आक्रोश है कि फाइनल एजेंडा तैयार करने से पहले उनसे चर्चा तक नहीं की गई। उसके बाद पांच दिन पहले एजेंडा उनके पास नहीं पहुंचा। जिसकी वजह से वह एजेंडे को लेकर तैयारी नहीं कर सके। ऐसी स्थिति मेें हाउस मीटिंग का पहला चरण तो हंगामे और एजेंडे पर ही उलझ सकता है। ऐसी स्थिति में निगम के एजेंडे में रखे गए प्वाइंट्स पर चर्चा होने से ज्यादा समय बहस में उलझ सकता है।
रेजिडेंट्स की मांग हो विकास
पंचकूला के रेजिडेंट्स का कहना है कि निगम की अंदरूनी राजनीति से उनको कुछ लेना देना नहीं है। उनकी मांग तो सिटी का विकास है। सिटी में स्ट्रीट लाइट्स, सड़कों के साथ ही पार्कों के ब्यूटीफिकेशन और राउंड एबाउट की समस्याएं हैं, जिनको बेहतर किया जाना चाहिए। राकेश अग्रवाल ने कहा कि निगम में अंदरूनी तौर पर क्या है क्या नहीं, इससे उनको कोई लेना देना नहीं। बस सिटी का विकास चाहिए। एसके नैय्यर ने कहा कि निगम एरिया में साफ सफाई और विकास कार्य जरूरी हैं, जिसके लिए योजना बनाने के साथ ही उसको कार्यरूप में परिणीत करना चाहिए।
पार्षद लिली बावा का कहना है कि पार्षदों ने अपने एजेंडा प्वाइंट निगम में समिट कर दिए। लेकिन एजेंडा तैयार करने के पहले कम से कम एक बार निगम की बैठक बुलानी चाहिए थी, जिससे पता चले कि प्वाइंट एजेंडा में रखे गए हैं कि नहीं। अब तक निगम की हाउस मीटिंग के पहले ऐसा नहीं हुआ। हमेशा एजेंडा तैयार करने से पहले एक मीटिंग जरूर बुलाई जाती थी लेकिन अबकी बार ऐसा नहीं हुआ।
पंचकूला नगर निगम की मेयर उपिंदर अहलूवालिया ने बताया कि हाउस मीटिंग के लिए पहले पहले एजेंडा तैयार किया जाता है। एजेंडा तैयार करने के बाद ही हाउस की मीटिंग की तिथि फिक्स की जाती है। निगम में मीटिंग की जानकारी तो दे दी गई पर फाइनल एजेंडा डिस्कस नहीं किया गया।
पार्षद भावना गुप्ता का कहना है कि वह काफी समय से पार्षद हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मीटिंग का नोटिस तो आ गया लेकिन निगम का एजेंडा नहीं आया। नियमानुसार एजेंडा पांच दिन पहले आना चाहिए। मीटिंग 25 को है और एजेंडे की कॉपी अब तक हमारे पास नहीं आई।