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पंचकूला: फ्लोर मिलों की हालत खराब, 3 पर लग चुका ताला

Sun, 22 Nov 2015 01:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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पंचकूला की फ्लोर मिलों पर अब ताला लटकने की नौबत आ गई है। इसकी वजह है टैक्स और बिजली के बढ़े रेट हैं। इनकी वजह से पंचकूला की तीन फ्लोर मिलों पर ताला लटक चुका है और कई ऐसे प्लेयर्स हैं, जो कि इसको छोड़ने वाले हैं। पंचकूला में पांच फ्लोर मिलें हैं, इन फ्लोर मिलों की मजबूरी है यहां लगाया जाने वाला टैक्स, जो कि 5.25 फीसदी है। जबकि पंजाब और चंडीगढ़ में टैक्स फ्री है।
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ऐसी स्थिति में इन फ्लोर मिलों में तैयार किया गया आटा, सूजी और मैदा चंडीगढ़ और पंजाब को टक्कर नहीं दे पाता है। फ्लोर मिलों के उद्यमियों की माने तो प्रोडक्शन अब एकदम खत्म हो चुका है। दस साल पहले तक यह फ्लोर मिलें 24 घंटे काम करती थीं, अब इन फ्लोर मिलों में दो घंटे ही काम हो पाता है।

उद्यमियों के मुताबिक फ्लोर मिलों के लिए गेहूं हरियाणा से ही खरीदा जाता है। पहले इन फ्लोर मिलों में लगभग पांच सौ लोगों को रोजगार मिलता था, अब बमुश्किल पचास से साठ लोगों को ही रोजगार मिल पाता है। पंचकूला के एक उद्यमी विनोद मित्तल ने बताया कि लाखों रुपये की लागत से फ्लोर मिल लगाई और अब हालात यह हो गई है कि मुश्किल से यह दो से चार घंटे काम करती हैं।
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फ्लोर मिल के रोल पर भी बिजली की बाधा
पंचकूला में फ्लोर मिलों के लिए रोल्स तैयार किए जाते हैं। रोल्स बनाने वाले इरले केजे रोल्स के मालिक नवनीत सिंगला ने बताया कि उनके तैयार किए गए रोल्स देशभर में सप्लाई किए जाते हैं। यह पंचकूला की एकमात्र रोल्स मिल है।

उन्होंने बताया कि आतंकवाद के दौरान उन्होंने बिजनेस मलेरकोटला से पंचकूला शिफ्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि यहां फ्लोर मिलो की जरूरत के लिए रोल्स तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। प्राफिट का मार्जिन कम हो चुका है।

बाधा
चंडीगढ़ में टैक्स फ्री
पंजाब में टैक्स फ्री
पंचकूला में टैक्स-5.25 फीसदी
मार्केट फीस-4.00 फीसदी
टर्नओवर-100 करोड़ रुपये
रोजगार-पचास व्यक्ति

अब बिजनेस करीब करीब खत्म हो रहा है। हरियाणा में बिजली के रेट्स के साथ ही टैक्स की मार ने हमको कंपटीशन के लायक नहीं छोड़ा। जो माल तैयार भी करते हैं उसको हम काफी कम मार्जिन पर बेचते हैं। हमको कम मार्जिन पर भी ऐसी मार्केट तलाशनी पड़ती है, जहां हमारा माल खप सके।
- धर्मपाल मित्तल, उद्यमी

पंचकूला की फ्लोर मिल इंडस्ट्री कुछ साल पहले तक अच्छा रेवेन्यू कमाती थी, अब ऐसा नहीं रह गया है। टैक्स और बिजली से राहत दी जाए तो हम कंपटीशन में आएंगे। लाखों रुपये की लागत से इंडस्ट्री लगाई और अब हमारा काम सिर्फ दो घंटे का रह गया है जबकि हमको लेबर की कास्ट उतनी ही देनी पड़ रही है, जिससे हमारी परेशानी बढ़ चुकी हैं।
- सतीश सिंगला, उद्यमी

इंडस्ट्री परेशानी के दौर से गुजर रही है। मल्टीनेशनल कंपनियों आ गईं हैं। जिससे व्यापार की स्थिति बदल गई है। छोटे उद्यमियों की परेशानी बढ़ गई है। हम इंडस्ट्री पर वर्क कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जल्द ही इंडस्ट्री को इस दौर से निकालें।
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- ज्ञानचंद गुप्ता, विधायक पंचकूला
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