एमडीसी-पांच की सोसाइटियों में रहने वाले लोगों के बिजली बिल जमा कराने में पसीने छूट गए। बिजली निगम ने पहले एक बिल भेजा, लेकिन बाद में पेन से संशोधित कर दूसरा बिल भेज दिया गया।
लोग यही बिल लेकर सोसाइटियों में लगे कैंप में भुगतान करने गए, लेकिन कर्मियों ने भुगतान लेने से इनकार कर दिया।
इसकी वजह यह थी कि बिल पर संशोधन के बाद न तो हस्ताक्षर था और न ही मुहर। कुल मिलाकर लापरवाही बिजली निगम की थी, लेकिन खामियाजा लोगों को ही भुगतना पड़ा।
इससे इस क्षेत्र में 40 सोसाइटियों में रहने वालों को परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि, अधिकारियों से बातचीत के बाद कुछ लोगों ने पावर कालोनी स्थित एचबीवीएन दफ्तर में चेक के जरिये बिलों का भुगतान किया।
माता मनसा देवी, सेक्टर-पांच आरडब्ल्यूए के प्रेसिडेंट सुभाष सचदेवा ने बताया कि अधिकतर सोसाइटियों में कंप्यूटराइज्ड बिल को संशोधित कर भेजा गया था।
शुक्रवार को भी एमडीसी-पांच की जीएच-आठ में कर्मियों ने कैंप लगाया था, लेकिन उन्होंने संशोधित बिलों का भुगतान लेने से मना कर दिया।
जीएच-39 के लिए 18210 रुपये का कंप्यूटराइज्ड बिल भेजा गया था, लेकिन बाद में इसे पेन से संसोधित कर 5198 रुपये कर दिया गया।
संशोधन के दौरान कर्मियों ने वहां न तो हस्ताक्षर किए और न ही सील लगाए। यही कमी लोगों की परेशानी की वजह बनी।
एमडीसी पांच की एक सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी वीके गुप्ता ने कहा कि उनकी सोसाइटी का पहले 7100 रुपये का बिल आया। बाद में इसे पेन से काटकर 2954 रुपये कर दिया गया।
आखिरी दिन इसे जमा कराने पहुंचे तो कर्मियों ने बिल जमा लेने से इनकार कर दिया।