केस- 1: पंजाब के 30 वर्षीय गुरविंदर सिंह (बदला हुआ नाम) पीजीआई में 26 फरवरी को होने वाले ट्रांसप्लांट गेम 20-20 में बैडमिंटन, क्रिकेट और कैरमबोर्ड में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। तीन साल पहले गुरविंदर का पीजीआई मेंकिडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। वे ट्रांसप्लांट के बाद भी अपने पुराने शौक को बरकरार रखे हुए हैं।
केस- 2: शिमला की 45 वर्षीय सरोज (बदला हुआ नाम) भी इस गेम में रस्साकस्सी और 100 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगी। सरोज ने चार साल पहले अपने भाई को अपनी एक किडनी दान दी थी। लेकिन उसके बाद भी इनके दैनिक जीवन में कोई बदलाव नहीं आया। फिटनेस को लेकर बेहद सजग रहने वाली सरोज की आज भी रस्साकस्सी जैसी फन गेम और दौड़ पहली पसंद हैं।
ये तो महज दो उदाहरण हैं, पीजीआई में 26 फरवरी को आयोजित होने वाले ट्रांसप्लांट गेम 20-20 में चंडीगढ़ समेत देश के विभिन्न शहरों से ऐसे 500 से ज्यादा प्रतिभागी भाग लेंगे, जिन्होंने जीते जी अंगदान किया है और जिनका पीजीआई में अंग प्रत्यारोपण हुआ है। इस आयोजन के माध्यम से अंग प्रत्यारोपण को लेकर लोगों के बीच फैले भ्रम को दूर किया जाएगा।
अंगदान करने और अंगा प्रत्यारोपण कराने के बाद भी जिंदगी सामान्य रूप से चल सकती है। बस जज्बा और सोच सकारात्मक होना जरूरी है। कार्यक्रम की तैयारियों में पीजीआई रोटो और ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग पूरी तरह जुटा हुआ है। इसके उच्चाधिकारियों का कहना है कि ऐसे अवसरों के जरिए ही लोगों के मन में बैठी पुरानी अवधारणाओं को दूर किया जा सकता है।
इसके जरिए ट्रांसप्लांट कराने व ऑर्गन देने वाले लोगों के मन का डर भी काफी हद तक दूर होगा।
धीरे-धीरे बढ़ रही भागीदारी
ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीज धीरे-धीरे इसे लेकर जागरूक हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसप्लांट के नाम पर पहले जितना डर दिखाई देता था वे कम हो रहा है। मरीज उसके बाद भी पहले वाली सामान्य जिंदगी जीने की सोच को सच साबित कर रहे हैं। इसके लिए हर दो साल पर आयोजित होने वाले ट्रांसप्लांट गेम में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस साल 500 से ज्यादा प्रतिभागी भाग लेंगे, जो पिछले सालों की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा संख्या है।
इन खेलों में लेंगे हिस्सा
26 फरवरी की सुबह पीजीआई के स्पोर्टर्स ग्राउंड में आयोजित ट्रांसप्लांट गेम 20-20 में बैडमिंटन, क्रिकेट, रिले रेस, पाथ वॉक, 100 मीटर की दौड़, साइकिलिंग, रस्साकस्सी और कैरमबोर्ड में प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
इन अंगों को कर सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम-से-कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैनक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कोर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगुठे दान किए जा सकते हैं।
पीजीआई में अब तक इतने हुए अंगदान
1996 से 2020 फरवरी तक की रिपोर्ट
किडनी- 409
लिवर- 76
हृदय - 15
पैनक्रियाज- 24
फेफड़ा- 2
कार्निया- 7969
ट्रांसप्लांट गेम 20-20 के माध्यम से अंगदान को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। जागरूकता अभियान से मौजूदा समय में लोगों की अवधारणा काफी तेजी से बदल रही है, लेकिन ऐसे आयोजनों का व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता