आर्गन डोनेशन कैंपेन ने मजहब की दीवारें तोड़ दी हैं। सिख परिवार के कहने पर एक मुस्लिम परिवार अपने ब्रेन डेड पेशेंट के चार अंगों को डोनेट करने के लिए आगे आया। दो किडनियां हिंदू परिवारों के सदस्यों को लगी हैं,जबकि कोर्निया को संभालकर रख दिया गया है।
नई जिंदगी पाने वाले एक हिंदु परिवार का कहना है कि रमजान के मौके पर मुस्लिम परिवार उनके लिए अल्लाह का रूप बनकर आया है। बिना किडनी उनकी जिंदगी बद से बदतर थी। उन्हें दोबारा से नया जीवन मिला है।
रोड एक्सीडेंट में घायल हुआ था
बताया जा रहा है कि 50 वर्षीय सलीम (बदला हुआ नाम) मोहाली के एक गांव का रहने वाला था। वह एक मजदूर था और एक सिख परिवार के खेतों में काम करता था। 21 जून की रात को सलीम जब बाइक से अपने घर वापस आ रहा था, तभी उसका एक्सीडेंट हो गया। गंभीर रूप से घायल सलीम को पीजीआई के एडवांस ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। अगले दिन उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
दो घंटे में मान गई फैमिली
पीजीआई के एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर मुस्लिम फैमिली अंगदान के लिए आगे नहीं आतीं, इसलिए उन्हें उम्मीद नहीं थी कि यह परिवार मान जाएगा। फिर भी एक चांस लिया गया। ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने उन्हें समझाने की कोशिश की और परिवार मात्र दो घंटे के भीतर मान गया। इस बात के लिए सलीम की पत्नी भी तैयार हो गई। उन्होंने बताया कि इसमें सबसे अहम रोल सरदार जी का था। उन्होेंने परिवार को अच्छी तरह से समझाया और वे मान गए। सरदार जी ने बताया कि मुस्लिम परिवार पिछले कई सालों से उनके साथ जुड़ा था। वह उनके परिवार जैसा ही था। जब डाक्टरों ने अंगदान के महत्व के बारे में समझाया तो उन्होंने सलीम के बेटे को मनाने की कोशिश की।