चंडीगढ़ होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंदर पाल सिंह ने कहा कि बार खुलने की इजाजत मिलने के बाद से कुछ राहत जरूर महसूस की है। कोरोना की वजह से रेस्टोरेंट काफी बदलाव करने पड़े हैं। ज्यादातर रेस्टोरेंट्स ने पारंपरिक मेन्यू कार्ड को खत्म कर दिया है। मेन्यू कार्ड को या तो अब ऑनलाइन कर दिया गया है या फिर क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं, जिसे ग्राहक स्कैन करेंगे तो रेस्टोरेंट का मेन्यू आ जाएगा। इसके अलावा टेबल को दूर-दूर किया गया है। निशान बनाए गए हैं। हर व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी।
बार खुले लेकिन खर्चे काफी बढ़ गए
शहर के बड़े होटल व्यवसायी व चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट एमपीएस चावला ने बताया कि प्रशासन ने भले ही बार खोलने की इजाजत दे दी है लेकिन ग्राहकों की काफी कमी है। उन्होंने कहा कि सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग आदि को बरकरार रखने में काफी खर्च करना पड़ रहा है। होटलों में कई तरह के बदलाव करने पड़े हैं।
लॉकडाउन के बाद से कारोबार बंद है। खर्चे पहले की तरह ही कायम हैं जबकि आमदनी जीरो हो चुकी है। बिजली के बिल से लेकर अन्य तमाम खर्चे उठाने पड़ रहे हैं। शादी विवाह के कार्यक्रम बंद हैं। छोटी-बड़ी पार्टियां भी नहीं हो रही हैं। लोग अभी भी कम ही रेस्टोरेंट में आ रहे हैं। यह पूरा साल खराब हो गया है।
विभाग को मिला करोड़ों का राजस्व
यूटी प्रशासन की तरफ से होटल और रेस्टोरेंट में बार खोलने की इजाजत देने के दो दिन के अंदर एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग को करीब चार करोड़ की आमदनी हुई है। एल थ्री, एल फॉर और एल फाइव लाइसेंस के 110 धारक हैं, जिसमें से करीब 80 से ज्यादा अपनी फीस जमा करवा दी है।
मंगलवार को लाइसेंस फीस के रूप में को दो करोड़, बुधवार और गुरुवार को करीब एक-एक करोड़ रुपये की राशि विभाग के पास जमा हुई है। एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने इस काम के लिए विशेष टीमें लगाई हुई हैं, ताकि लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। गौरतलब है कि शहर में होटल, रेस्टोरेंट में चल रहे बार भी प्रशासन की कमाई का प्रमुख साधन है, क्योंकि इनके बंद होने से होटल, रेस्टोरेंट को तो घाटे का सामना करना ही पड़ रहा था।