चंडीगढ़। यूएसए के लिए ऑनलाइन बुक हुई कंफर्म एयर टिकट कैंसिल किए जाने पर उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजे के तौर पर 10 हजार रुपये हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से टिकट बुकिंग में खर्च हुए अतिरिक्त 15 हजार और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।दायर याचिका के मुताबिक सेक्टर 15डी चंडीगढ़ निवासी शिकायतकर्ता रुमेश कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी के साथ यूएसए के बोस्टन शहर जाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल गोआईबीआईबीओडॉटकॉम से 6 फरवरी 2019 को इकोनाॅमी क्लास की दो एयर टिकट एक लाख 9 हजार 556 में बुक करवाई थी। ऑनलाइन पोर्टल से बुक करवाई गई आने जाने की टिकट की बुकिंग भी कन्फर्म कर दी गई थी। नई दिल्ली से बोस्टन और बोस्टन से नई दिल्ली आने-जाने के टिकटों की बुकिंग की बकायदा पुष्टि की गई थी। यह यात्रा 2 मई 2019 को नई दिल्ली से लंदन होते हुए बोस्टन तक होनी थी। नई दिल्ली से लंदन की यात्रा जेट एयरवेज और लंदन से बोस्टन की यात्रा वर्जन अटलांटिक एयरलाइंस के जरिए की जानी थी। हालांकि, जेट एयरवेज ने शिकायतकर्ता को बताया कि फंड की कमी के चलते जेट एयरवेज की उड़ानों का संचालन रद्द कर दिया गया, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने तुरंत मामले के बारे में गोआईबीआईबीओडॉटकॉम कंपनी को बताया। इस पर वेबसाइट की ओर से जेट एयरवेज से मामले की पूरी जानकारी होने के बाद उसे सूचित करने का आश्वासन दिया गया। शिकायतकर्ता को महत्वपूर्ण पारिवारिक समारोह में शामिल होना था इसलिए उसे दो टिकटों का दूसरा सेट 1,45,00 रुपये में खरीदना पड़ा। शिकायतकर्ता को 35,444 रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ा। शिकायतकर्ता के मुताबिक कंपनी ने 109556 रुपये की राशि को अवैध रूप से रोक लिया, जो सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। इस शिकायत का निवारण नहीं होने पर पीड़ित ने मामले को लेकर उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों को देखने और वर्तमान मामले के विभिन्न तथ्यों और घटनाओं को जानने के बाद उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता याचिका के पक्ष में फैसला सुनाया।
उपभोक्ता आयोग ने कहा कि एयरलाइन के कार्यक्रम में बदलाव के कारण शिकायतकर्ता पूरी राशि वापसी का हकदार है। उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की ब्याज दर से टिकट बुकिंग में खर्च हुए अतिरिक्त 15 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने पीड़ित को हुए मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।