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सहकारिता घोटाला : विपक्ष का 500 करोड़ के घोटाले का आरोप, सरकार ने जांच के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स गठित की

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सीएम ने की घोषणा, कहा चार जिलों की जांच में अब तक सिर्फ 8.80 करोड़ की अनियमितता मिली
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सरकार ने जवाब में कहा- चार अधिकारी को नौकरी से निकाला, 13 अफसर सस्पेंड, आरोपियों की प्रॉपटी अटैच कर होगी रिकवरी
वर्ष 1992 से लेकर आज तक बनी सहकारी समितियों में अनियमितताओं की करेगी जांच

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सहकारिता विभाग के घोटाले की गूंज विधानसभा में भी सुनाई पड़ी। विपक्ष ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान आरोप लगाया कि यह घोटाला 500 करोड़ से ज्यादा का है। छोटे अधिकारियों पर तो कार्रवाई की गई, मगर हरको बैंक के एमडी नरेश गोयल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पिछले दस साल से समितियों का ऑडिट नहीं कराया गया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर पहले सहकारिता मंत्री ने जवाब दिया। उसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा, चार जिलों में समितियों की जांच में अब तक सिर्फ 8.80 करोड़ रुपये की अनियमितता मिली है। उन्होंने 1992 से लेकर अब तक बनी सभी सहकारी समितियों में गड़बड़ियों की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है। राज्य में 600 से ज्यादा समितियां हैं। इसलिए इनकी जांच अब स्पेशल टॉस्क फोर्स करेगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक चिंरजीव ने कहा, इस पैसे से किसानों के लिए काम होना था। 2022 में इस मामले की शिकायत की गई थी, यदि उसी समय कार्रवाई हो जाती तो इतना बड़ा घोटाला नहीं होता। आरोपियों से पैसे की रिकवरी की बात कही गई है, मगर आरोपियों ने जो पैसा दुबई और कनाडा भेज दिया है, उसकी रिकवरी कैसे होगी। इनेलो नेता व विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि मंत्री के जवाब से लगता है कि जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है, उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा। सरकार ने स्वयं माना है कि यह घोटाला 100 करोड़ रुपये से ऊपर का है और अकेले मंत्री के जिले में 22 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस नरेश गोयल का इस घोटाले में नाम आ रहा है, वह 2014 से इसी पद पर है और वही दस्तखत करने की अथॉरिटी है। उसके हस्ताक्षर से ही पैसा निकलता है। उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि वह संघ का आदमी है। सहकारिता मंत्री पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा आपको इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि आपके विभाग में ऑडिट हो रहा है या नहीं। कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा, किरण चौधरी और नीरज शर्मा ने भी घोटाले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
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13 एफआईआर, चार अधिकारी बर्खास्त, 13 अधिकारी निलंबित : मंत्री
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि इस मामले में कुल 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जांच के बाद चार अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, 13 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। 17 नवंबर, 2022 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आईसीडीपी परियोजनाओं की जांच शुरू की। सरकार ने 11 जुलाई 2023 को कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम में चल रही परियोजनाओं के बैंक खातों को फ्रीज करने के निर्देश दिए। इन खातों से जमा फंड से सिर्फ वेतन और कार्यालय खर्च किया गया।
साल 2023-24 के दौरान कोई भी धनराशि जारी नहीं की गई। सरकार ने 23 अक्तूबर 2023 को वरिष्ठ लेखाकार सुमित अग्रवाल और 21 फरवरी को सहायक रजिस्ट्रार अनु कोशिश, उपलेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल, सहायक रजिस्ट्रार सहकारी रामकुमार को बर्खास्त कर दिया गया। इनके खिलाफ आरोप पत्र भी जारी कर दिया गया है। वहीं, सहायक रजिस्ट्रार कृष्ण चंद्र बेनीवाल, जितेंद्र कौशिक, महाप्रबंधक केंद्रीय सहकारी बैंक संजय हुड्डा, लेखा परीक्षा अधिकारी बलविंदर सिंह, उप रजिस्ट्रार रोहित गुप्ता, हरको बैंक के प्रबंधक विजय सिंह, सहायक रजिस्ट्रार सुनीता ढाका, सहायक रजिस्ट्रार संदीप खटकड़ व नरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। ऑडिट में गड़बड़ी होने पर ऑडिट विंग के लेखा परीक्षक विनोद कुमार, ईश्वर सिंह, वरिष्ठ लेखा परीक्षक ईश्वर सिंह, नीलम ढींगरा को ऑडिट करने में लापरवाही के कारण बीते 17 फरवरी को निलंबित कर दिया गया।
जांच में पता चला कि आईसीडीपी के अधिकतर कार्य दोषी स्टालिन जीत सिंह कंपनियां व फॉर्म को अलॉट किए गए। यह लगातार 20 वर्ष से सहकारी का विभाग में कार्य कर रही थी। सरकार ने हरको के बैंक प्रबंधक नरेश गोयल को 2017 में आईसीडीपी का अतिरिक्त कार्य भार सौंपा था। सरकार ने पांच फरवरी को आईसीडीपी के नोडल अधिकारी का चार्ज अन्य अधिकारी को दे दिया है। सरकार ने 2000 के बाद स्वीकृति सभी आईसीडीपी परियोजनाओं का फॉरेंसिक और तीसरे पक्ष से वित्तीय ऑडिट करवाने का भी निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, एमडी नरेश गोयल का नाम प्राथमिक रिपोर्ट में दर्ज नहीं था, यदि एसीबी अनुमति मांगेगी तो 15 दिन में अनुमति दे दी जाएगी।
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घोटाले के आरोपियों की प्रॉपटी जब्त
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन में बताया कि पैसे की रिकवरी के लिए विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों की प्रापॅर्टी भी अटैच की गई है। अनु कौशिश का मोहाली में एक घर व फ्लैट और करनाल में भूमि व बैंक अकाउंट अटैच किया गया है। पूर्व आरसीएस रामकुमार का कुरुक्षेत्र में आवासीय प्लॉट और बैंक अकाउंट, योगेंद्र अग्रवाल का मोहाली में फ्लैट और बैंक अकाउंट, सुमित अग्रवाल और उसकी पत्नी का बैंक अकाउंट व फ्लैट, नितिन शर्मा का जीरकपुर में फ्लैट व बैंक अकाउंट अटैच किया गया है।
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