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Chandigarh News: मास्टर प्लान में बदलावों का विरोध, लोग बोले- खत्म हो जाएगी चंडीगढ़ की पहचान

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रशासन द्वारा प्रस्तावित नीतिगत बदलावों और संशोधनों, विशेषकर वर्टिकल ग्रोथ तथा फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने के प्रस्तावों को लेकर शहर में विरोध तेज हो गया है। इन प्रस्तावों पर 25 जून को यूटी गेस्ट हाउस में नागरिकों की आपत्तियां और सुझाव सुने जाएंगे। कई नागरिक और संस्थाएं अपनी लिखित आपत्तियां पहले ही जमा करा चुकी हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग सुनवाई के दौरान सीधे अपनी बात रखेंगे। प्रशासन को अब तक 200 से अधिक आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं।
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रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और नागरिक संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन चंडीगढ़ की मूल पहचान और उसकी वास्तुकला की आत्मा को नुकसान पहुंचाएंगे। क्राफेड के चेयरमैन हितेश पुरी ने कहा कि मास्टर प्लान में कुछ क्षेत्रों में इमारतों की ऊंचाई 30 मीटर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो ली कार्बुजिए के मूल सिद्धांतों-सूर्य, स्थान और हरियाली के विपरीत है। उनका कहना है कि इससे शिवालिक पहाड़ियों का प्राकृतिक दृश्य भी प्रभावित होगा।
बुनियादी ढांचा चरमरा सकता है
फॉसवेक के अध्यक्ष बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि शहर की पानी, बिजली, सीवरेज और ड्रेनेज व्यवस्था पहले से दबाव में है। ऐसे में ऊंची इमारतों और बढ़ती आबादी का बोझ बुनियादी ढांचे को पूरी तरह चरमरा सकता है। उन्होंने कहा कि एफएआर और ग्राउंड कवरेज 40 फीसदी तक बढ़ाने से वाहनों की संख्या बढ़ेगी और सेक्टरों में पार्किंग संकट और गहरा जाएगा।
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वैकल्पिक मार्ग को भी मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया जाए
आरडब्ल्यूए मॉडर्न हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष कर्नल गुरसेवक सिंह (वेटरन) ने मांग की कि मनीमाजरा हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में मल्टीलेवल पार्किंग और रेलवे अंडरब्रिज से आने वाले ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक मार्ग को भी मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया जाए, ताकि रिहायशी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम हो।
औद्योगिक संगठनों ने भी संशोधनों पर असंतोष जताया
निवासियों ने बिना व्यापक शहरी प्रभाव मूल्यांकन के हाईराइज इमारतों को मंजूरी देने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े और दूरगामी बदलावों पर अध्ययन और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दिया गया 21 दिन का समय अपर्याप्त था। वहीं, औद्योगिक संगठनों ने भी संशोधनों पर असंतोष जताया है। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा कि औद्योगिक भूखंडों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की लंबे समय से लंबित मांग को नजरअंदाज किया गया है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अवि भसीन ने एमएसएमई और सर्विस सेक्टर गतिविधियों के लिए स्पष्ट नियमों की मांग उठाई, जबकि चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरंजीव सिंह ने बिल्डिंग नियम उल्लंघन पर लगने वाली भारी पेनल्टी को तर्कसंगत बनाने और नियमितीकरण की मांग दोहराई।
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