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Chandigarh News: खुली किताबें नहीं मिलेंगी, दिक्कत है तो स्कूल में कर लो बात

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चंडीगढ़। पूरा सेट लेना पड़ेगा, खुली किताबें नहीं मिलेंगी, दिक्कत है तो स्कूल में बात कर लो। पंचकूला निवासी हरदीप चंडीगढ़ में सेक्टर-22 की मॉर्डन बुक शॉप में रविवार को बच्चे की केजी कक्षा की तीन पुस्तकें खरीदने गए तो उन्हें दुकानदार से यह जवाब सुनना पड़ा। सोमवार से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में अन्य दुकानों पर किताबें न मिलने से अभिभावक को मजबूरन 2500 रुपये से अधिक का स्टेशनरी का सामान लेना पड़ा।सेक्टर-43 स्थित शिशु निकेतन पब्लिक स्कूल में पढ़ रहे बच्चे की किताबें अभिभावक को पंचकूला में कहीं नहीं मिली। इस पर अन्य अभिभावकों ने सेक्टर-22 से किताबें लेने के लिए कहा गया। मॉडर्न बुक शॉप में अभिभावक तीन पुस्तकें लेने पहुंचा तो स्कूल और कक्षा का नाम सुनकर विक्रेता ने 37 अन्य चीजों की लंबी सूची थमा दी। इस बारे में पूछा तो दुकानदार ने बताया कि यह सूची उन्हें स्कूल से ही मिली है। अभिभावक ने बाकी चीजें लेने से इंकार किया तो दुकानदार बोला- खुली किताबें नहीं मिलेंगी, दिक्कत है तो स्कूल वालों से बात करलो। अन्य जगह पुस्तकें न मिलने से अभिभावक को 2500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। इस अतिरिक्त सामान में दो शार्पनर, पेंसिल बॉक्स, पांच इरेजर, व्हाइट ग्लू, स्टिक ग्लू आदि चीजें शामिल हैं। हरदीप की तरह मॉर्डन बुक शाॅप आए सभी अभिभावकों को पूरा सेट लेना पड़ रहा है।
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पिछले साल की तरह इस बार भी मूक दर्शक बना शिक्षा विभाग
सेक्टर-22 स्थित मॉर्डन बुक शॉप पर सेक्टर-43 के शिशु निकेतन पब्लिक स्कूल के अलावा सेंट मेरी स्कूल, अंकुर स्कूल और सेक्टर-32 स्थित एसडी पब्लिक स्कूल की पुस्तकें सिर्फ मॉडर्न बुक शॉप पर मिल रही हैं। शिक्षा विभाग पिछले साल की तरह इस बार भी हाथ धरे बैठा है। विभाग को अभिभावकों से शिकायत आने का इंतजार है लेकिन अपनी क्षमता पर विभाग कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है।

दो बार कोटिंग कर महंगे दाम पर बेच रहे किताबें
सेक्टर-46 स्थित सेंट मेरी स्कूल की केजी कक्षा की पुस्तकें मॉडर्न बुक शॉप से लेकर आए अभिभावक ने बताया उन्हें महंगे दाम पर पुस्तकें बेची गईं और मजबूरन सारा सेट खरीदना पड़ा। हिंदी की पुस्तक शब्द मंथन उन्हें शॉप ने 300 की बेची, जबकि प्राइज के नीचे खुर्च कर देखने पर असली दाम 270 रुपये था। ऐसे ही अंग्रेजी की लर्न टू राइट पुस्तक अभिभावक को 260 रुपये की बेची गई, जबकि उसका दाम असली दाम 230 रुपये है। अभिभावक के स्कूल में शिकायत देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
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