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बहवाल पाथेर और नमक का दरौगा नाटकों को हुआ ऑनलाइन मंचन

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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित ऑनलाइन कला महोत्सव ‘नई उम्मीद, नई पहल’ ने बुधवार को दूसरे सप्ताह के तीसरे दिन में प्रवेश किया। इसमें चित्रकला, लोक संगीत, नृत्य, थियेटर, साहित्य और शास्त्रीय संगीत जैसी शैलियों के कलाकारों ने हिस्सा लिया। गुलाम मोहम्मद खालिद एंड ग्रुप लोलपुरा, बारामुला के कलाकारों ने भांड पाथेर शैली में रचित नाटक ‘बहवाल पाथेर’ की प्रस्तुति की। यह कहानी एक बेरोजगार आदमी की है, जिसे काम करना पसंद नहीं है। उसका परिवार उसे पंचायत में ले जाता है। पंचों के समझाएं जाने के बाद वह काम करना शुरू कर देता है। वहीं जम्मू के रंगमंच के कलाकार जनक खजुरिया ने मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित ‘नमक का दारोगा’ पढ़ी। कहानी एक इंस्पेक्टर की है जो अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करता है।
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कार्यक्रम में चित्रकार कादम्बरी, कवल पाल, वीपी वर्मा, गुरप्रीत, संजू, लोक नाथ देब और प्रसाद मिस्त्री ने ऐक्रेलिक रंगों का प्रयोग करते हुए भगवान का चित्र बनाया। वहीं कलाकार कंवल पाल ने ‘शिव शक्ति’ का चित्र बनाया। इसमें भगवान को शिव तांडव करते हुए दिखाया गया है। शिव के एक हाथ में डमरू और दूसरे में अग्नि है। मूर्तिकार गुरमीत गोल्डी, हंसराज चित्रा, योगेश प्रजापति, प्राणबेश मोंडल और कुलदीप थीम के अनुसार लकड़ी की मूर्तियां बना रहे हैं।
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