फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऑनलाइन शिक्षा हुई खत्म, बच्चों की नहीं छूट रही मोबाइल की लत

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण खत्म होने को लगभग एक वर्ष होने को आया है, लेकिन बच्चों को स्मार्ट डिवाइस और मोबाइल की पड़ी आदत अभी भी नहीं छूटी है। ऑनलाइन शिक्षा के समय में बच्चे सोशल मीडिया पर आ गए और उन्हें रील्स व वीडियो आदि देखने की आदत पड़ गई है। इसके अलावा मोबाइल गेम्स का चस्का नहीं छूट रहा है। स्कूलों में बच्चों के मोबाइल लाने पर पाबंदी है, इसके बावजूद आए दिन किसी न किसी छात्र के पास से मोबाइल पकड़ा जाता है।
विज्ञापन

कोट्स :
अभी भी बच्चे स्कूल में छिपाकर ले आते हैं मोबाइल
स्कूल में मोबाइल लाने पर पाबंदी है, लेकिन अभी भी कुछ बच्चे बैग में छिपाकर स्कूल में मोबाइल ले आते हैं। बच्चों को इंटरनेट और मोबाइल गेम्स की आदत पड़ गई है। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक भी घरों में बच्चों के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने का कार्यक्रम बनाए और उन पर निगरानी रखें। स्कूलों में बच्चों की मोबाइल लत को लेकर काउंसलिंग भी की जा रही है। - डॉ. धर्मेंद्र, प्राचार्य, जीएमएचएस, रामदरबार
अभिभावक निगरानी रखें, बच्चों मोबाइल का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं
डिजिटल एजुकेशन के जमाने में मोबाइल बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन गया है क्योंकि स्कूल की तरफ से कई बार इंफोग्राफिक और डिजिटल पोस्टर बनाने की असाइनमेंट दी जाती है, ऐसे में डिजिटल डिवाइस को पूरी तरह जिंदगी से निकाल नहीं सकते हैं। हां यह जरूरी है कि अभिभावकों को निगरानी रखनी चाहिए कि बच्चे मोबाइल पर देख क्या रहे हैं, क्या वह कोई शिक्षाप्रद काम कर रहे हैं या अपना समय व्यर्थ गवां रहे हैं। - सीमा रानी, प्राचार्य, जीएमएसएसएस धनास
विज्ञापन

कोरोना काल में बच्चों को सोशल मीडिया की पड़ी आदत
कोरोना काल में दो साल जब बच्चों के हाथ में मोबाइल आया है तब से बच्चे सोशल मीडिया पर आ गए हैं। बच्चे कक्षा में छुपाकर मोबाइल ले आते हैं और शिक्षक के कक्षा से बाहर जाते ही या छुट्टी के समय रील्स आदि देखते रहते हैं। अभिभावकों को थोड़ा सा सतर्क रहना होगा कि वे बच्चों को अपना ही मोबाइल दें, उन्हें उनका निजी मोबाइल नहीं दिलवाए जिससे उनकी गतिविधियों पर ध्यान रखा जा सके। - स्वर्ण सिंह, शिक्षक, जीएमएसएसएस-22
बच्ची को मोबाइल से बचाने के लिए लैपटॉप पर दिखाते हैं शिक्षाप्रद वीडियो
कोरोना काल में बच्चों की सारी पढ़ाई मोबाइल पर ही निर्भर हो गई थी। हालांकि अब बस पाठ्यक्रम आदि की जानकारी ही मोबाइल पर भेजी जाती है। फिर भी बच्चे को मोबाइल नहीं दे रहे हैं, उसके विकल्प के रूप में परिवार के बड़े सदस्य के साथ बैठाकर बच्ची को लैपटॉप पर शिक्षाप्रद वीडियो दिखाना या कोई असाइनमेंट करवाते हैं। इसके अलावा बच्चे को ड्रॉइंग करने और कहानियां पढ़ने की आदत डाली है, जिससे खाली समय में मोबाइल पर ध्यान नहीं जाए। - अजय राणा, अभिभावक
ध्यान हटते ही बच्चे चला लेते हैं यू ट्यूब
ऑनलाइन शिक्षा खत्म होते ही बच्चे से निजी मोबाइल ले लिया है। अभी बच्चा हमारा मोबाइल ही कई बार स्कूल का ग्रुप आदि देखने या कोई शिक्षाप्रद वीडियो देखने के लिए लेते हैं। ध्यान हटते ही बच्चे यू-ट्यूब चला लेते हैं। दो साल में बच्चों की आदत बिगड़ गई है। बाहर बच्चों के लिए शाम को खेलने जाते हैं, लेकिन रात को मोबाइल लेने की जिद्द लगा कर रखते हैं। - मनीष सोनी, अभिभावक
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें