चंडीगढ़। कोरोना महामारी ने शिक्षा की धारा को बदल दिया है। ऐसे हालात में शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभरकर सामने आया है। पहले यह सीमित दायरे में था, लेकिन आज लगभग सभी घरों में अपनी पकड़ बना चुका है। ट्राइसिटी के कई स्कूल जूम, गूगल जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर बच्चों को लाइव लेक्चर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो अभी शुरुआत है। इतनी जल्दी स्कूल और विद्यार्थी ऑनलाइन एजुकेशन के आदी नहीं हो पाएंगे। इसमें अभी समय लगेगा, मगर इस समय को बर्बाद नहीं करना है। कुछ नया सीखना है। सीखने की कोशिश करेंगे तो बहुत कुछ पाएंगे। विषेशज्ञों का भी यह मानना है कि यह दौर भारत में पांच साल बाद आने वाला था, लेकिन कोरोना के चलते पहले आ चुका है। ऐसे में इस प्लेटफार्म का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए। अमर उजाला ने ऑनलाइन एजुकेशन को लेकर ट्राइसिटी में पड़ताल की तो कई तथ्य सामने आए-