चंडीगढ़ में हर 25 में से एक महिला पर स्तन कैंसर का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 53 और एक का है। पीजीआई के पॉपुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री में इसकी पुष्टि पहले ही हो चुकी है। इससे पता चलता है कि चंडीगढ़ में कैंसर की स्थिति क्या है। इसके बावजूद जागरूकता का स्तर बहुत धीमा है।
जांच और इलाज कराने आने वाले लोगों की संख्या इसकी तुलना में बेहद कम है। ये बातें पीजीआई के हेमेटोलॉजी मेडिकल आंकोलॉजी के प्रमुख डॉ. पंकज मल्होत्रा ने शनिवार को कहीं। वे पीजीआई में आयोजित इंटरनेशनल वुमेन्स कैंसर कॉन्फ्रेंस में बतौर वक्ता बोल रहे थे।
रेडियोथैरेपी की डॉ. भावना और गाइनकोलॉजी विभाग की डॉ. रिम्मी ने बताया कि कैंसर के मरीज के लिए सिर्फ एक विशेषज्ञ काम नहीं कर सकता। इसके लिए एक साथ कई अलग-अलग विशेषज्ञों की जरूरत होती है। उसके बाद ही मरीज को बेहतर इलाज मिल पाता है। पीजीआई में गाइनी सर्जरी, रेडियोथैरेपी, मेडिकल आंकोलॉजी, गाइनी पैथालॉजी, रेडियोडाइग्नोसिस विभाग की ओर से मिलकर इसके लिए मल्टीडिसीप्री बोर्ड भी संचालित किया जा रहा है। इसमें ऐसे मरीजों के बारे में मिलकर निर्णय लिया जाता है ताकि मरीज को इलाज के लिए यहां-वहां न भटकना पड़े।
डॉ. भावना ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए डॉक्टरों को प्रशिक्षित करना है ताकि वे सिर्फ एक विशेषज्ञता तक सिमट कर न रहें। वहीं, उनके मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। डॉ. रिम्मी ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिए कई वैक्सीन उपलब्ध हैं। वहीं, सरकार प्रयास कर रही है कि उसे अपने नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाए ताकि महिलाओं से संबंधित कैंसर को होने से पहले ही रोका जा सके।