एक राष्ट्र एक भाषा की हिमायत कर विवादों में फंसे गुरदास मान जहां अपनी बात पर कायम हैं, वहीं पंजाबी लोकगायकी व संगीत की दुनिया के लोग खुलकर विरोध में उतर आए हैं। पंजाबी संगीत की दुनिया में एक बहस शुरू हो गई है। प्रसिद्ध गायक बब्बू मान का कहना है कि अपनी भाषा को भूलना अकलमंदी नहीं है। पंजाबी जैसी कोई भाषा पूरे विश्व में नहीं है। बब्बू मान ने कहा कि उन्होंने अपनी रुचि के लिए उर्दू से लेकर कई भाषाओं का अध्ययन किया लेकिन पंजाबी जैसी कोई बोली व भाषा नहीं मिली। यह एक अकड़ वाली भाषा है, जिसका अपना रौब है।
पंजाबी गायक सुखशिंदर शिंदा ने कहा कि एक बात याद रखना, अपनी मां बोली को अगर भूल जाओगे तो बुरी तरह से बिखर जाओगे। पंजाबी हमारी मां बोली है, वह जिंदाबाद है जिंदाबाद रहेगी। पंजाबी विरसा को देश विदेश तक पहुंचाने वाले मनमोहन वारिस ग्रुप के दीपक बाली का कहना है कि हमारी संस्कृति व विरासत को बचाने में मां बोली व पंजाबी भाषा का सबसे अहम योगदान है। एक राष्ट्र एक भाषा पंजाबी विरासत को नुकसान पहुंचाएगी।
प्रसिद्ध गायक अमरिंदर गिल ने पंजाबी बोली के पक्ष में उतरते हुए उस्ताद नाजमी की चंद लाइनों को अपनी फेसबुक वाल पर लिखा है। इसमें लिखा है कि तब तक पंजाबी बोली को कोई मार नहीं सकता, जब तक पंजाबन महिला पुत्रों को जन्म देती रहेगी। कनाडा में बसी प्रसिद्ध कवयित्री नवजोत कौर ढिल्लों ने तो गुरदास मान व पंजाबी बोली पर पूरी कविता लिखते हुए डटकर पंजाबी बोली का पक्ष लिया है। आखिर में चंद लाइनों में लिखती है कि जा बेटा लौट जा उसी के पास जिसकी तूं संतान, तेरी मां का दिल बहुत बड़ा है बोलेगी कि बेटा भटक गया था, इतनी है धनवान। तेरी मां बोली है दयावान, तेरी मां पंजाबी है धनवान।
हिंदी नहीं कहती, पंजाबी बोलना बंद कर दो: श्वेत मलिक
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक भी एक राष्ट्र एक भाषा विवाद में कूद गए हैं। मंगलवार को जालंधर में उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्र और मातृ भाषा हिंदी है, जबकि प्रदेश की बोली पंजाबी है। कुछ लोगों की मानसिकता ही नेगेटिव हो गई है, जो भावना को समझते ही नहीं है।
हिंदी राष्ट्र भाषा होने से क्या पंजाबी बोली पर असर पड़ सकता है। मलिक मंगलवार को जालंधर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके साथ प्रदेश महासचिव राकेश राठौर, जिला प्रधान रमन पब्बी के अलावा प्रदेश युवा मोर्चा प्रधान सन्नी शर्मा व पूर्व विधायक मनोरंजन कालिया, केडी भंडारी और पूर्व चेयरमैन मोहिंदर भगत भी मौजूद थे।
मलिक ने अपना उदाहरण दिया कि मैं पंजाबी में बात कर रहा हूं, हिंदी कभी नहीं कहती कि पंजाबी बोलना बंद कर दो। हिंदी हमारी मातृ भाषा है लेकिन इससे कन्नड़ हो या तेलुगू या पंजाबी, किसी बोली को फर्क नहीं पड़ता। हिंदी पूरे राष्ट्र की भाषा होने से हमने यह पाबंदी तो नहीं लगा दी कि किसी प्रदेश में कोई अन्य भाषा नहीं होगी।
केंद्रीय राज्यमंत्री सोम प्रकाश की पत्नी को टिकट देने की चर्चा पर मलिक ने कहा कि भाजपा में यह कहीं भी नहीं है कि परिवार में टिकट नहीं दिया जा सकता। जो जीतने की क्षमता रखता है, उसको टिकट मिलेगा ही। मलिक ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाया कि उनके राज में लूट खसोट और करप्शन का बोलबाला है। जब भी कोई उपचुनाव आते हैं तो कैप्टन कोई न कोई सपना लोगों को दिखा देते हैं। इस बार उपचुनाव में कैप्टन सरकार की धक्केशाही नहीं होने दी जाएगी।
मां बोली को लेकर गुरदास मान मांगें माफी: संत समाज
विदेश में काफी समय से रह रहे सिखों का नाम काली सूची से निकलवाने पर सिख संत समाज ने इसे केंद्र सरकार का सराहनीय कदम बताया है। इस फैले विदेशों में रहने वाले सिख वतन वापस आ सकेंगे। साथ ही कहा कि पंजाबी मां बोली के लिए गलत प्रतिक्रिया देने वाले गुरदास मान को माफी मांगनी चाहिए।
यह बातें सिख पंथ के प्रचारक संत बाबा मनमोहन सिंह बारन वाले ने सोमवार को राजपुरा में पत्रकारों से कहीं। डेरा बाबा दीप सिंह के मुख्य सेवादार संत बाबा प्रीतम सिंह, बाबा सुरिंद्र सिंह, भाई अमरीक सिंह, भाई मलकीत सिंह की मौजूदगी में बाबा मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि विदेशों में बसे सिखों की काली सूची वाली लिस्ट जल्द ही सार्वजनिक की जाए, ताकि जो सिख अब बुजुर्ग हो चुके हैं, वह अपने दस्तावेज तैयार कराकर अपने परिवार से मिल सकें।
उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब का रास्ता खुलवाने से सिख समाज में बेहद खुशी का माहौल है। इस निर्णय भारत में रहने वाले गुरुनानक नाम लेवा संगतों को श्री गुरू साहिब जी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। उन्होंने कहा पाकिस्तान की ओर सेकरतारपुर गुरुद्वारा साहिब में जाने वाले सिखों पर जजिया टैक्स 1400 रुपये लगाने की वह निंदा करते हैं। पाकिस्तान को सिखों भावनाओं का आदर करते हुए इसे वापस लेना चाहिए।
उन्होंने 1984 सिख दंगों के आरोपी सजन कुमार को सलाखों के पीछे धकेलने की बात कहते हुए कहा कि अन्य आरोपियों जगदीश टाइटलर सहित बाकियों को पुरानी फाइलें निकालकर जेलों में भरना चाहिये, ताकि सिख समाज के नासूर बन चुके घावों पर मरहम लगाई जा सके। उन्होंने कहा पंजाबी मां बोली के लिए गलत प्रतिक्रिया देने वाले गुरदास मान को देश की पंजाबी जनता से माफी मांग लेनी चाहिए। ऐसे कलाकारों को अपनी शब्दावली का ध्यान रखना चाहिए और सोच समझकर बोलना चाहिए।