चंडीगढ़। उपभोक्ता आयोग ने शोरूम के लिए प्लॉट खरीदने के एक मामले में उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न के लिए 20 हजार और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर अदा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आयोग ने याचिकाकर्ता की ओर से प्लॉट खरीदने के लिए बयाने के रूप में दी गई 1 लाख 87 हजार 250 रुपये की रकम नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर से अदा करने के आदेश दिए हैं। मामले में याचिकाकर्ता ने इमर्जिंग इंडिया रियल एसेट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने कंपनी के लांडरां-बनूड़ हाईवे पर चल रहे इमर्जिंग वर्ल्ड नाम के एक हाउसिंग व कमर्शियल प्रोजेक्ट में 250 वर्ग फुट के शोरूम के प्लॉट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ ही शोरूम बुकिंग अमाउंट देने के बाद पीड़ित को पता चला कि कंपनी कि ओर से चलाए जा रहे उक्त प्रोजेक्ट को संबंधित प्राधिकरण से अनुमति ही नहीं मिली थी और न ही उसके पास प्रोजेक्ट को लेकर लाइसेंस था।
याची रामलाल वर्मा की ओर से उपभोक्ता आयोग में इमर्जिंग इंडिया रियल एसेट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कंपनी के लांडरां-बनूड़ हाइवे में इमर्जिंग वर्ल्ड नाम के एक हाउसिंग व कर्मशियल प्रोजेक्ट में निवेश शुरू किया था। शिकायतकर्ता ने कंपनी के प्रोजेक्ट में 250 वर्ग फुट के शोरूम के प्लॉट के लिए आवेदन किया था। प्लॉट की कुल कीमत 9 लाख 50 हजार रुपये थी। इसके लिए उसने सितंबर 2019 में बिल्डर को 1,87,250 का भुगतान किया। शेष राशि का भुगतान बाद में करना था। कुछ महीनों बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट के लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुमति नहीं ली थी और न ही उसके पास प्रोजेक्ट को लेकर लाइसेंस था। ऐसे में बिल्डर ने उन्हें शाेरूम का प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी की। शिकायतकर्ता ने बिल्डर को दी शोरूम की बुकिंग अमाउंट 1 लाख 87 हजार 250 रुपये की रकम लौटाने के लिए कहा। कई बार राशि लौटाने का अनुरोध करने पर भी शिकायतकर्ता को रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद पीड़ित ने मार्च 2021 में बिल्डर के खिलाफ आयोग में याचिका दायर की थी।