फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नर्स की गलती से मरीज का सवा दो लाख रुपए की दवा खराब, देर रात तक हंगामा

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। एक मरीज का करीब सवा दो लाख रुपये की दवा नर्स से खराब हो जाने पर वीरवार को पीजीआई की ओपीडी में खूब हंगामा हुआ। मरीज के परिजनों का आरोप है कि पहले तो पीजीआई का स्टाफ कहता रहा है कि वह मरीज को दवा मुहैया करवा देंगे। मगर देर शाम मुकर गए। देर रात डिप्टी एमएस डा. महेश देवनानी पहुंचे और कहा कि यह सब गलती से हुआ है। पेशेंट की मदद के लिए जो कुछ हो सकेगा, किया जाएगा। परिजनों को शुक्रवार सुबह एमएस के आफिस में बुलाया गया है। विवाद का निपटारा वहीं होगा। हालांकि परिजनों का कहना है कि वह नर्स पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते। बस उसके मरीज को इंजेक्शन लग जाए। दूसरी तरफ इस घटना के बाद नर्स काफी घबरा गई है, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई, देर रात उसे एडमिट करा दिया गया है।
विज्ञापन

चंडीगढ़ निवासी मरीज रंजनी कौशल के बेटे नितिन ने बताया कि उसकी मां को पेट का कैंसर है। कैंसर की रोकथाम के लिए क्रिमजा दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी कीमत बाजार में सवा दो लाख रुपये है। वीरवार को उसकी मां को कीमो लगनी थी। वह कीमो के साथ न्यू ओपीडी के डे केयर सेंटर पहुंचे। करीब 11 बजे डे केयर सेंटर में मौजूद नर्स बबीता ने कीमो चढ़ाने के लिए दवाई ली और उसे डेक्सट्रास में डाल दी जबकि यह दवा नार्मल एनएस सॉल्यूशन में डालकर चढ़ानी थी। बबीता ने गलती से डेक्सट्रास (ग्लूकोज के मॉलिक्यूलर फार्मूला) में डाल दी। इससे दवा खराब हो गई। वह किसी काम की नहीं रही। बस यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
ऐसे पता चला कि दवा गलत सॉल्यूशन में डाल दी है
रंजनी कौशल के बेटे नितिन ने बताया कि जब नर्स ने गलत सॉल्यूशन में दवा डाल दी तो उस दौरान किसी को पता नहीं था। जब उसके भाई ने देखा कि नार्मल एनएस का पैकेट बच गया है तो उसके होश उड़ गए। उसने नर्स से पूछा कि यह पैकेट कैसे बच गया। दवा तो इसी में डालकर चढ़ाई जानी थी। आनन-फानन में देखा गया तो गलती का खुलासा हुआ। इससे न सिर्फ डे केयर सेंटर का स्टाफ सकते में आ गया बल्कि मरीज के परिजनों के भी होश उड़ गए।
विज्ञापन

पहले कहा देंगे, बाद में मुकर गए
परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब नर्सिंग स्टाफ मान गया कि उसकी गलती हुई है तो उन्होंने मरीज को आश्वासन दिया कि इंजेक्शन मुहैया करवाया जाएगा लेकिन जैसे ही शाम को डे केयर सेंटर का काम समाप्त हुआ तो उन्होंने आनाकानी शुरू कर दी। मरीज ने इस बारे में पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को आपस में ही सुलझाने की सलाह दी। हालांकि देर रात परिजनों ने पुलिस को इस मामले में डीडीआर दे दी है। परिजनों का कहना है कि पीजीआई की ओर से उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। बस यह बताया कि इस मामले का निपटारा मेडिकल सुपरिंटेंडेंट शुक्रवार को करेंगे।
यदि दवा चढ़ती तो मरीज को कुछ भी हो सकता था
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मरीज को डेक्सट्रॉस सॉल्यूशन के साथ दवा डाली जाती तो मरीज के साथ कुछ भी हो सकता था। क्योंकि कीमो को किसी सॉल्यूशन के साथ चढ़ाई जानी है तो यह सब एक लंबे रिसर्च के बाद तय होता है। इसलिए डाक्टर भी मरीज के कार्ड में कीमो की डोज और किस सॉल्यूशन के साथ कितनी मात्रा में डाली जानी है, बिल्कुल साफ-साफ लिखते हैं, ताकि डे केयर सेंटर वालों को कोई कंफ्यूजन न हो।
कोट
हम लोग नर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते। नौकरी बहुत मुश्किल मिलती है। इस बात को हम लोग अच्छी तरह से समझते हैं। हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि मरीज को दवा लग जाए। दवा काफी महंगी है। यदि दवा सस्ती होती तो हम लोग दवा भी नहीं मांगते।
विज्ञापन

-नितिन, महिला मरीज का बेटा
कोट
पीजीआई पेशेंट हित में काम करेगा। संस्थान की तरफ से मरीज को जितनी मदद हो सकेगी, वह जरूर की जाएगी। आला अधिकारी इस पूरे मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं।
-मंजू वडवालकर, प्रवक्ता, पीजीआई
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें