चंडीगढ़। पीयू यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में मास्टर कोर्स (एमई) की दाखिला प्रक्रिया में आगामी सत्र से बदलाव करने जा रही है। इसमें पीयू की ओर से करवाई जाने वाली दाखिला परीक्षा को रद्द किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को शनिवार को आयोजित सिंडिकेट बैठक में रखा गया था, जिसमें सदस्यों ने इसे मंजूरी दे दी है। इसमें गेट उत्तीर्ण उम्मीदवारों प्राथमिकता दी जाएगी और इसके बाद खाली सीटों पर मेरिट के आधार पर दाखिला दिया जाएगा। पंजाब यूनिवर्सिटी में पिछले सत्र में इंजीनियरिंग में मास्टर कोर्स की कई सीटों पर कुल सीटों से भी कम आवेदन मिले थे। सीटें भरने के लिए दाखिला प्रक्रिया में बदलाव करने का फैसला लिया गया था। आवेदन कम होने के कारण दाखिला परीक्षा रखना घाटे का सौदा था।
पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित सिंडिकेट बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी रीजनल सेंटर लुधियाना में एलएलएम दो वर्षीय कोर्स को एक वर्ष में तब्दील करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। पीयू में डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस एंड नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्सेज में सर्विंग डिफेंस अफसरों की आरक्षित सीटों को बढ़ा दिया गया है। पीजी डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेंट एंड सिक्योरिटी में वर्तमान में 14 सीटें सर्विंग डिफेंस अफसरों के लिए आरक्षित हैं, इनकी संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई है। वहीं पीजी डिप्लोमा इन होमलैंड सिक्योरिटी में वर्तमान 15 सीटों से बढ़ाकर 25 सीट करने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। इसके अलावा लड़कियों के छात्रावास नंबर-5 का नाम बदलकर माता सावित्रीबाई फुले हॉल रखा जाएगा। अभी इसका नाम सावित्रीबाई फुले हॉल है। इसको लेकर अंबेडकर छात्र संगठन ने वीसी दफ्तर के बाहर लंबे समय तक धरना दिया था। वहीं छात्रावास के बढ़ाए गेस्ट मूल्यों को वापस ले लिया गया है, इसे फिर से 100 से 80 रुपये कर दिया गया है। लेकिन जुलाई से इसमें बढ़ोतरी कर 100 रुपये लागू किया जाएगा।
वुमन डीएसडब्ल्यू के लिए डॉ. वंदना और सिमरन काहलों का नाम प्रस्तावित
पीयू की वुमन डीएसडब्ल्यू प्रो. प्रोमिला पाठक 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रही हैं। इसलिए एक अप्रैल से डीएसडब्ल्यू वुमन के पद पर नई नियुक्ति की जाएगी। इसको लेकर सिंडिकेट के सदस्यों ने वाइस चांसलर को नियुक्ति के लिए अनुमति दे दी है। सदस्यों ने वुमन डीएसडब्ल्यू के लिए लॉ विभाग की डॉ. वंदना और जियोग्राफी विभाग की सिमरन काहलों के नाम को प्रस्तावित किया है।
पीएचडी शोधकर्ता महिला शादी के बाद अन्य यूनिवर्सिटी में करवा सकेगी रिसर्च डाटा ट्रांसफर
पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही महिलाओं के लिए खुशखबरी है। पीयू ने पीएचडी दिशा-निर्देशों में यूजीसी के अनुसार और नई शिक्षा नीति के मद्देनजर बदलाव किए हैं। कमेटी ने पीएचडी दिशा-निर्देश-2023 को मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार अब अगर पीयू में कोई युवती पीएचडी के लिए भर्ती होती है और शोध के दौरान अगर उसकी शादी हो जाती है तो वह अन्य यूनिवर्सिटी में अपना रिसर्च डाटा ट्रांसफर करवा सकती है। इसमें जो शोध युवती ने उस दौरान किया होगा, उसका श्रेय जिस यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए पंजीकृत है उस संस्थान और सुपरवाइजर को देना होगा। इस फैसले से महिलाओं को पीएचडी करने में राहत मिलेगी। कई बार सुदूर राज्यों में शादी होने की वजह से महिलाओं को अपनी डिग्री बीच में छोड़नी पड़ती है। वहीं पीएचडी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षक की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय रहने के बाद वह नए पीएचडी शोधार्थी को अपने अंतर्गत पंजीकृत नहीं करवा सकेगा। हालांकि वह शिक्षक शोधार्थी को सुपरवाइज और को-सुपरवाइज करना जारी रख सकेगा। इसके लिए तय उम्र सीमा 70 वर्ष तक रखी गई है। वहीं कोई भी शिक्षक अपने और अपने जीवनसाथी के खून के रिश्ते में उम्मीदवार का पीएचडी गाइड नहीं बन सकता है।