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अब गज व मरले के हिसाब से तय होगा कचरे का शुल्क

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चंडीगढ़। शहर में अब मरले व गज के हिसाब से कचरे का शुल्क तय होगा। अधिसूचना में वर्ग फुट के हिसाब से कचरे के शुल्क तय किए गए थे, जिससे लोगों को काफी समस्या हो रही थी। निगम पॉलिसी में बदलाव के लिए सदन की बैठक में एजेंडा लेकर आ रहा है। सदन की स्वीकृति के बाद अधिसूचना में बदलाव का निर्णय होगा।
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निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि शहर में ज्यादातर घर व कोठी गज या मरले के हिसाब से तय किए गए हैं। अधिसूचना के अनुसार प्रति रसोई वर्ग मीटर व वर्ग फुट के हिसाब से शुल्क तय किए गए हैं। इससे लोगों को अपने शुल्क का आंकलन करने में समस्या हो रही है। इसे लेकर निगम में भी कई आपत्तियां आईं और पार्षदों से लोगों ने अपनी समस्या साझा की। लोगों की सहूलियत के लिए अब इकाई में बदलाव का प्रस्ताव सदन के सामने रखा जा रहा है। सदन की सहमति के बाद इस पर आगे की प्रक्रिया होगी।
इस तरह रहेगा कचरे का शुल्क
2 मरले से कम - 50 रुपये
2 से 8 मरले तक - 100 रुपये
8 मरले से 1 कनाल तक- 200 रुपये
1 कनाल से 2 कनाल तक - 250 रुपये
2 कनाल से ज्यादा - 350 रुपये
स्ट्रीट वेंडर- 100 रुपये
ढाबा, मिठाई या कॉफी की दुकान- 500 रुपये
गेस्ट हाउस, धर्मशाला, भवन, होटल, 50 लोगों तक खाना खाने वाला स्थान- 2 हजार रुपये
50 लोगों से ज्यादा खाना खाने वाला स्थान, 3 स्टार होटल- 3 हजार रुपये
3 स्टार से ज्यादा वाला होटल- 5 हजार रुपये
व्यावसायिक ऑफिस, शैक्षणिक संस्थान, बैंक, अस्पताल, क्लीनिक व लैब- 2 हजार रुपये
गोदाम, कोल्ड स्टोर- 5 हजार रुपये
सामुदायिक केंद्र व शादी वाले स्थल- 1 हजार रुपये प्रति आयोजन
क्लब, सिनेमा हॉल, पब- 4 हजार रुपये
वाहनों पर विज्ञापन सहित आएंगे 15 एजेंडे निगम इस बार वाहनों पर विज्ञापन की पॉलिसी की नियम व शर्तों को सदन में लेकर आ रहा है। राजस्व के लिए निगम ने यह एजेंडा तैयार किया है। इसके अलावा कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ के पांच सवालों, लोकल गवर्नमेंट की ओर से किए गए निर्देशों की जानकारी देने, मशीनें खरीदने की अनुमति, आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी लेने, सेक्टर-23 के जंज घर के निर्माण की अनुमति, तीनों रोड डिवीजन में साइन बोर्ड लगाने की अनुमति, सेक्टर-29 स्थित मैंगो गार्डन में पाइपलाइन डालने, सेक्टर-25 स्थित कचरा निस्तारण प्लांट के अपग्रेडेशन, दक्षिण सेक्टरों में सफाई के लिए कंपनी का टेंडर बढ़ाने, सीएनडी वेस्ट प्लांट के प्रक्रिया को बढ़ाने का एजेंडा लेकर आ रहा है।
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7 माह बाद फिर वर्चुअल बैठक, कांग्रेस बोली- हमसे डरी भाजपा
पिछले साल मार्च माह से सदन की बैठक कोरोना महामारी के कारण वर्चुअल हुई थी। अक्तूबर माह में अपने ही पार्षदों के विरोध के बाद तत्कालीन मेयर ने बैठक फिजिकल करने का निर्णय लिया था। लगभग 7 माह बाद इस बार फिर से बैठक वर्चुअल होगी। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि हमारे सवालों के जबाव देने से भाजपा बच रही है, इसलिए बैठक वर्चुअल कर दी है। कांग्रेस पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि जब 800 केस थे और लॉकडाउन था, उस वक्त सदन में बैठक हुई। अब जब केस 200 है, तब वर्चुअल बैठक बुलाई गई है। भाजपा कांग्रेस से डर गई है और उसमें दम खत्म हो गया है।
कोट
कोरोना महामारी के कारण मानकों को ध्यान में रखकर यह फैसला किया गया है। भाजपा के कुछ पार्षद अभी एकांतवास में हैं। ऐसे में बैठक फिजिकल कराना ठीक नहीं है। हम ही मानकों का पालन नहीं करेंगे तो फिर जनता को कैसे इसका पालन करने के लिए कहेंगे। -रविकांत शर्मा, मेयर
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