चंडीगढ़। बेहोशी की दवा प्रोपोफोल से पीजीआई में मरीजों की मौत का मामला अभी सुलझा भी नहीं कि एक और गंभीर मामला सामने आ गया। एनेस्थिसिया के इंजेक्शन से सेक्टर-39 निवासी साढ़े छह वर्षीय बच्ची अमरीन की हालत बिगड़ गई और उसकी जीभ सूजकर चार सेमी मोटी हो गई। यही नहीं जीभ पर अल्सर भी बन गया है। बच्ची पांच दिन से कुछ खा-पी नहीं पा रही।
सात अक्तूबर को पीजीआई के दंत विभाग में बच्ची का रूट कैनाल किया गया था। बच्ची की बिगड़ी हालत से परिजन डरे हुए हैं और अब दोबारा इलाज के लिए पीजीआई नहीं जाना चाहते। उन्होंने पीजीआई प्रशासन से मामले की शिकायत की है।
अमरीन की मां जसप्रीत कौर खुद भी एक डॉक्टर हैं। उन्होंने बताया कि दांत में दर्द की शिकायत पर वह अमरीन का इलाज पीजीआई में करवा रहीं थीं। सात अक्तूबर से पहले भी उसकी आरसीटी की गई थी लेकिन उस दौरान कोई परेशानी नहीं हुई। सात अक्तूबर को डॉक्टर ने प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक स्प्रे किया और फिर एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया। उसे कौन सी दवा दी गई, इसकी जानकारी नहीं है क्योंकि डॉक्टर ने अस्पताल की आपूर्ति वाली दवा का प्रयोग किया था। घर लौटते ही अमरीन को दर्द होने लगा और परेशानी शुरू हो गई। देखते ही देखते उसकी जीभ लगभग चार सेमी तक सूज गई और अल्सर भी हो गया। हालत यह है कि पांच दिन बाद भी वह पानी तक नहीं पी पा रही। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सोमवार को जब डॉक्टर से शिकायत की तो उनका जवाब था कि बच्ची ने जीभ जबा लिया होगा इसलिए ऐसा हुआ है। डॉ. जसप्रीत का कहना है कि उन्हें इस बात की शंका है कि डॉक्टर ने दवा की डोज गड़बड़ दी है, जिसके कारण ऐसा दुष्प्रभाव सामने आया है।
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कुछ समय पहले दांत निकलवाने आई युवती की हो गई थी मौत
बता दें कि 22 सितंबर को पंजाब यूनिवर्सिटी के डॉ. हरवंश सिंह जज इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में दांत निकलवाने आई 30 वर्षीय युवती की एनेस्थीसिया देने के कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी। उस दौरान डॉक्टरों ने बताया था कि एनेस्थीसिया देने के बाद युवती ने बेचैनी और सांस में दिक्कत होने की शिकायत की थी। कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम से होनी थी लेकिन अब तक उसका भी खुलासा नहीं किया गया है।
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पीजीआई ने कहा- स्वास्थ्य विभाग को सौंपी रिपोर्ट, स्वास्थ्य निदेशक बोलीं-कोई रिपोर्ट नहीं मिली
दूसरी तरफ पीजीआई में बेहोशी के दवा से हुई मौत में मामले की जांच रिपोर्ट को लेकर अब भी संशय बरकरार है। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि उनके द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट को स्वास्थ्य निदेशक को सौंप दिया गया है जबकि स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने ऐसी कोई रिपोर्ट मिलने से साफ इनकार किया है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में हुए खुलासे के आधार पर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। उधर, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में उनके स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि मामला यूटी प्रशासन के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
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यह मामला क्लीनिकल है। जब तक संबंधित विभाग इससे जुड़े तथ्यों की जानकारी नहीं देता तब तक इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई