चंडीगढ़ में सुखना लेक पर अब नहीं होगी ऊंट की सवारी।
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चंडीगढ़ की सुखना लेक पर अब लोगों को ऊंट की सवारी का सुख नहीं मिलेगा। लेक पर बिना अनुमति के पिछले कई सालों से ऊंट की सवारी करवाकर जीवन यापन करने वाले लोगों को पशु क्रूरता निवारण के लिए बनाई गई सोसायटी (एसपीसीए) ने सुखना पर ऊंट न लाने के निर्देश दिए हैं। एसपीसीए के अनुसार इन ऊंटों का पंजीकरण नहीं कराया गया है, उनके मालिक अपनी मर्जी से लोगों को राइडिंग करवा रहे हैं। टीम निरीक्षक धमेंद्र डोगरा की अगुवाई में मंगलवार को सुखना लेक पहुंची थी। ऊंट से राइडिंग करा रहे लोगों से टीम ने पंजीकरण और राइडिंग का अनुमति पत्र मांगा तो वह दिखा नहीं सके। इसके बाद टीम ने बिना अनुमति राइड कराने पर पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत चालान काटकर आगे से राइडिंग न कराने के निर्देश दिए।
20 साल से ऊंट की राइडिंग करवाकर चला रहे रोजी रोटी
ऊंट के मालिक राजू ने बताया कि वह और उनका चचेरा भाई केसर पिछले 20 साल से सुखना लेक पर सैलानियों को ऊंट की सवारी करवाकर अपनी रोजी रोटी चला रहे हैं। ऊंट का दाना हरियाणा से लेकर आते हैं। अब घर खर्च और ऊंट का दाना लाना भी मुश्किल हो जाएगा। केसर ने बताया कि हमारे दोनों परिवार की बेटियां भी बड़ी हो गई हैं। उनकी शादी होने वाली है। ऐसे में इनकी शादी कैसे करवाएंगे।
पूरे चंडीगढ़ में थे तीन ऊंट, अब रह गए दो
ऊंट के मालिकों ने बताया कि पूरे शहर में तीन ऊंट थे, जिनसे सैलानियों को राइडिंग कराई जाती थी। हम दो भाई लेकर पर राइड करवाते थे और एक बाबा जी रोज गार्डन के बाहर ऊंट की सवारी करवाते थे। बाबा जी का कुछ महीने पहले निधन हो गया। अब हम दोनों भाई ही सैलानियों को ऊंट की सवारी करवाते हैं।
किसी व्यक्ति ने हमसे शिकायत की थी कि लेक पर बिना अनुमति के ही ऊंट की राइड करवाई जा रही है। टीम ने जांच की तो पाया कि ऊंट वालों के पास कोई अनुमति पत्र नहीं है। वहीं कोरोना संक्रमण काल में भी दोनों ऊंट वाले लोगों को बिना सामाजिक दूरी के ही सैर करवा रहे थे, जो गलत है। चालान काट दिया है, अदालत में दोनों को चालान भुगतना होगा। - धर्मेंद्र डोगरा, निरीक्षक, एसपीसीए