इस बार पंचायत चुनावों में रिजर्व सीटों पर बाहरी प्रदेशों से ब्याह कर लाई गई लड़कियों को ताल ठोंकते देखा जा सकता है। विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनीं ये बहुएं अब गांवों में चौधर की लड़ाई लडेंगी।
एससी सरपंच के लिए आरक्षित गांवों में दबंग लोग इन ‘पारो’ के जरिए मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। रोहतक जिले के एक बड़े गांव भालौठ में ऐसा ही परिवार तो अपनी बहू को एससी सीट पर उतारने का ऐलान भी कर चुका है।
विस चुनाव में बनीं मुद्दा तो पंचायत चुनाव में बनाएंगी मुद्दा
खट्टर सरकार में कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ विधानसभा चुनाव में बाहर से लाई जा रही बहुओं पर टिप्पणी से विवादों में आ गए थे। प्रदेश में कुंवारों की शादी करवाने को लेकर कई दूसरे नेताओं के बयान भी सामने आए। अब ये बहुएं ही पंचायत चुनाव में एससी सीटों पर ताल ठोंककर दबंगों के सहारे चौधर का डंका बजाने की तैयारी में हैं।
भालौठ बना पहला गांव
रोहतक जिले का गांव भालौठ पारो की राजनीति का गवाह बनेगा। 5500 मतदाता वाले गांव में पहली बार सरपंच का पद एससी उम्मीदवार के लिए आरक्षित रखा गया है लेकिन यहां एक सामान्य जाति के परिवार ने दूसरे प्रदेश से लाई गई एससी बहू को मैदान में उतार दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आज तक इस तरह का चुनाव न तो पहले कभी देखा और न ही सुना। आसपास के गांवों में भी इसके चर्चे हैं।
अरसे से सरपंची का ख्वाब, अब बहुएं बिगाड़ेंगी गणित
हरियाणा में दूसरे प्रदेशों से ब्याह कर लाई गई महिलाएं पंचायती चुनाव में कइयों का गणित बिगाड़ सकती हैं। लंबे अरसे से चौधर का ख्वाब देख रहे एससी वर्ग के पुरुषों की ये पत्नियां प्रतिद्वंद्वियों की नींद उड़ा सकती हैं।
भले ही दूसरे प्रदेशों से लाई गई एससी या ओबीसी श्रेणी की महिला की सामान्य श्रेणी के व्यक्ति से शादी की हुई हो लेकिन उसे एससी या ओबीसी श्रेणी में ही माना जाएगा। उसकी जाति नहीं बदलेगी। ऐसे में यदि किसी गांव में एससी की सीट रिजर्व है तो सामान्य वर्ग का व्यक्ति अपनी एससी वर्ग की पत्नी को चुनाव मैदान में उतार सकता है।
वर्जन
रेवाड़ी के डीडीपीओ एसी कौशिक का कहना है कि महिला चाहे किसी भी प्रदेश की हो, उसकी जाति उसके पिता की जाति ही मानी जाएगी। यदि एससी वर्ग की महिला सामान्य वर्ग में ब्याही जाती है तो उसकी जाति नहीं बदलेगी। वह एससी की सीट से चुनाव लड़ सकती है। हालांकि सर्विस में नियम दूसरे हैं। सर्विस में दूसरे प्रदेश की महिला या पुरुष किसी भी जाति का हो, उसे सामान्य श्रेणी का ही माना जाएगा।