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Chandigarh News: अब ट्रेन या स्टेशन पर एक रुपया भी चोरी होने पर दर्ज होगा केस

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चंडीगढ़। एक जुलाई से लागू तीनों नए आपराधिक कानूनों का असर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कामकाज पर भी पड़ेगा। पहले जीआरपी या आरपीएफ चोरी या झपटमारी से जुड़े मामलों में केस दर्ज करने में आनाकानी करते थे लेकिन अब रेलवे परिसर में एक रुपये की चोरी पर भी केस दर्ज करना होगा। तीन कानूनों में एक से पांच हजार रुपये तक की चोरी से जुड़े मामलों में सामुदायिक तौर पर सजा का प्रावधान किया गया है।
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रेलवे से जुड़ी कोई भी संपति या मामले में आरपीएफ की ओर से स्पेशल रेल एक्ट के तहत केस दर्ज करने का प्रावधान है जबकि राजकीय रेलवे पुलिस रेलवे से जुड़े सभी प्रकार के मामले केवल आईपीसी की धाराओं के तहत ही दर्ज करती थी लेकिन जीआरपी भी अब आईपीसी की जगह बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज करेगी। अब अगर रेल या रेलवे स्टेशन पर किसी यात्री का एक रुपया भी चोरी होता है तो शिकायत पर जीआरपी थाने में बाकायदा चोरी का केस दर्ज किया जाएगा। वहीं, प्लेटफार्म पर किसी भी यात्री या व्यक्ति के पांच हजार रुपये तक चोरी होते हैं और दोषी पहली बार अपराध करते पकड़ा गया है और पैसों को लौटा देता है तो भी ऐसे मामलों में सामुदायिक तौर पर सजा का प्रावधान किया गया है। चोरी का केस दर्ज होने पर अदालत उसे तीन साल की सजा के साथ जुर्माना लगा सकती है।

रेलवे में सबसे अधिक जीरो एफआईआर : तीन नए कानूनों में जीरो एफआईआर पर भी नया प्रावधान किया गया है। जीरो एफआईआर से जुड़े सबसे अधिक मामले केवल रेलवे में ही सामने आते हैं क्योंकि ट्रेनों में अक्सर यात्रियों के साथ चोरी या छीनाझपटी की वारदातें होती हैं और पीड़ित यात्री अपने निर्धारित स्टेशन पर उतरने के बाद ही जीआरपी थाने में शिकायत देते हैं। शिकायत के आधार पर उक्त स्टेशन के जीआरपी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई के लिए चोरी वाले स्टेशन के जीआरपी थाने में भेजा जाता है। वहां जीरो एफआईआर पहुंचने के बाद पुलिस कई दिनों तक कार्रवाई नहीं करती लेकिन अब नए कानून में जीरो एफआईआर दर्ज करवाने के लिए शिकायतकर्ता को तीन दिन के अंदर-अंदर उक्त थाने में जाकर हस्ताक्षर करने होंगे।
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