मंडियों और खरीद केंद्रों पर यह किसान की इच्छा पर निर्भर होगा कि वे किसके माध्यम से अपना अनाज बेचना चाहता है। कई जिलों में किसान उत्पादक संगठनों व ग्राम पंचायतों ने कच्ची आढ़त का लाइसेंस लिया हुआ है। जबकि कई जगह सरकारी एजेंसियां भी खरीद कर रही हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसान इनके माध्यम से अपनी फसल सरकार को बेचना चाहता है तो उनकी शेड्यूलिंग संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव करेंगे। जबकि वे किसान जो अपनी फसल आढ़तियों के माध्यम से ही बेचना चाहते हैं तो उनकी शेड्यूलिंग आढ़तियों के माध्यम से ही प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
मंडियों से अनाज का उठान भी बड़ी चुनौती
हरियाणा की मंडियों में खरीद कार्य को सुचारु रूप से शुरू हो चुका है। लेकिन पैक हो चुके अनाज का समय से उठान भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रदेश की कई मंडी और खरीद केंद्रों में अभी भी अनाज की काफी संख्या में बोरियों उठान के इंतजार में पड़ी हुई है। हरियाणा व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने बताया कि अधिकतर खरीद केंद्रों में न तो अनाज रखने के लिए लकड़ी के कैरेट है और न ही तिरपाल की व्यवस्था।
उठान कार्य भी बहुत धीमा चल रहा है, इसलिए सरकार को चाहिए कि कम से कम मंडियों और खरीद केंद्रों में जरूरी मूलभूत सुविधाएं तो उपलब्ध करवाएं। ताकि खरीद का काम आसानी से चल सके और समय पर उठान कार्य भी हो सके। वरना बारिश आने पर मंडी और खरीद केंद्रों पर पड़ा गेहूं भीग जाएगा।
महामारी के इस दौर में प्रदेश किसी भी प्रकार से चीनी की किल्लत नहीं होगी। प्रदेश की सभी सहकारी और प्राइवेट चीनी मिलों में इस बार पिछले साल के अपेक्षाकृत चीनी की रिकवरी अधिक हुई है। यह प्रदेश सरकार और जनता दोनों के लिए राहत की बात है। यह खुलासा शुक्रवार को सभी चीनी मिलो मैं चीनी रिकवरी की रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान हुआ।
सहकारी चीनी मिलों व निजी क्षेत्र की चीनी मिलों ने सीजन 2019-20 में पिछले सीजन 2018-19 से अधिक चीनी रिकवरी प्राप्त की है। जबकि सीजन 2019-20 में 15 अप्रैल 2020 तक 611.44 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 10.45 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की है। सीजन 2019-20 में 624.98 लाख क्विटंल गन्ने की पिराई कर औसतन 10.19 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की है।
सहकारिता मंत्री डा. बनवारी लाल ने बताया कि सहकारी चीनी मिलों ने सीजन 2019-20 में 353.48 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 9.95 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की। जबकि निजी चीनी मिलों से 257.96 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर औसतन 11.13 प्रतिशत चीनी की रिकवरी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि गन्ने की अगेती किस्म के लिए 340 रूपए प्रति क्विंटल तथा अन्य के लिए 335 रूपए प्रति क्विंटल का मूल्य राज्य सरकार द्वारा किसानों को दिया जा रहा है, जोकि भारत में सबसे अधिक है।