विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा गया है कि इन दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त साल्ट मिश्रण तय मानकों के अनुसार नहीं हुआ। इसके लिए सिरप को प्रतिबंधित करने के लिए अलर्ट जारी कर दिया था। गुरुवार को केंद्र व प्रदेश की टीमों ने कंपनी में दिनभर जांच की थी और पांच सैंपल लेकर केंद्रीय प्रयोगशाला कोलकाता में भेजे थे।
एक जांच अधिकारी ने बताया कि उन्होंने प्रयोगशाला से दो सप्ताह में प्राथमिकता के आधार पर जांच रिपोर्ट भेजने को कहा है। गुरुवार रात करीब 10 बजे तक टीमें जांच करती रहीं। इसके बाद शुक्रवार को दूसरे दिन राज्य औषधि नियंत्रक मनमोहन तनेजा टीम के साथ फैक्टरी पहुंचे और जांच शुरू कर दी। टीम ने दूसरे दिन कंपनी में बनने वाली अन्य दवाओं के भी सैंपल लिए हैं। उनकी भी जांच कराई जाएगी।
शुक्रवार को फैक्टरी के गेट पर एमसीए, गांबिया की तरफ से एक नोटिस चस्पाया गया। नोटिस में कंपनी को 21 दिन के अंदर संबंधित प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज दिखाने का निर्देश दिया गया है। जांच पूरी होने तक कंपनी की किसी भी दवा का आयात नहीं हो सकेगा। क्वारंटीन किए गए पूरे स्टॉक की एमसीए की तरफ से मान्यता प्राप्त लैबोरेटरी से जांच करवाई जाएगी। इसके अलावा संदिग्ध चारों कफ सिरप के साथ ही अन्य उत्पादों के आयात पर भी रोक लगाई गई है। कंपनी के आईएसओ व डब्ल्यूएचओ प्रमाणपत्र को भी चेक किया जाएगा।
जांच अधिकारियों ने खंगाले दस्तावेज
कुंडली औद्योगिक क्षेत्र स्थित कंपनी का गेट दूसरे दिन भी बंद रहा। अंदर से कोई बाहर नहीं आया, जबकि सुबह ही जांच अधिकारी कंपनी के अंदर गए थे। उनके अलावा किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। हरियाणा के ड्रग्स कंट्रोलर अधिकारियों के साथ कंपनी में पहुंचे और कई घंटे तक दस्तावेज खंगाले। टीमें देर शाम तक कंपनी में जांच करती रहीं। इस दौरान बाहर खड़े पत्रकारों को फोटो लेने व वीडियो बनाने पर टोका गया।
पांच सैंपल लेकर कोलकाता भेजे गए हैं। उसकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। गुरुवार देर रात तक टीम डटी रही, शुक्रवार को भी सुबह से दस्तावेजों की जांच जारी है। पूरे मामले में बारीकी से जांच जारी है। कुछ अन्य दवाओं के भी सैंपल लिए गए हैं। - मनमोहन तनेजा, राज्य औषधि नियंत्रक