जहां एक ओर प्रशासन में मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति के लिए माथापच्ची चल रही है। वहीं भाजपा में इस बात पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है कि मनोनीत पार्षदों से वोटिंग का अधिकार वापस ले लिया जाए। इसका बड़ा कारण यह भी है कि इस बार भाजपा को मेयर बनवाने के लिए किसी के भी समर्थन की जरूरत नहीं है। जबकि सांसद किरण खेर मनोनीत से वोटिंग का अधिकार लेने के पक्ष में नहीं है।
जबकि भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन के कई करीबी नेता इस पक्ष में है। भाजपा अध्यक्ष की ओर से यह सुझाव हाईकमान को भी पहुंचा दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि इसलिए मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति में देरी हो रही है। पहले 21 दिसंबर को मनोनीत पार्षदों की घोषणा प्रशासन करने जा रहा था लेकिन अब यह मामला 28 दिसंबर तक टाल दिया है।
सत्ता में आने पर किया था वादा
2011 के नगर निगम चुनाव में भाजपा के सीनियर नेताओं ने चुनावी वादे में कहा था कि अगर वह सत्ता में आए तो मनोनीत पार्षदों का वोटिंग अधिकार समाप्त कर देंगे। उस समय जिन नेताओं ने वादा किया था वह केंद्र की राजनीति में हैं। लेकिन उस समय भाजपा सत्ता में नहीं आ पाई थी। अब भाजपा बहुमत से सत्ता में आ चुकी है।
खेर नहीं चाहती वापस लिया जाए वोटिंग अधिकार
सांसद किरण खेर
- फोटो : File Photo
मनोनीत बनने के लिए लगी होड़
इस समय 65 लोगों ने मनोनीत पार्षद बनने के लिए प्रशासन के पास आवेदन किया हुआ है। ऐसे में मनोनीत पार्षद बनने की होड़ लगी हुई है। सांसद किरण खेर, भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन अपने अपने करीबियों को मनोनीत बनाने के लिए सिफारिश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के कई नेताओं के नाम भी प्रशासन को मनोनीत नियुक्त करने के लिए भेजे गए हैं।
जिनमें पार्टी उपाध्यक्ष सतप्रकाश अग्रवाल, देसराज गुप्ता, कैलाश चंद जैन और प्रदीप बंसल का नाम शामिल है। मालूम हो कि भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह मनोनीत को वोटिंग अधिकार देने के खिलाफ हैं। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन का कहना है कि किसी ने सुझाव दिया है कि मनोनीत को वोटिंग अधिकार नहीं मिलना चाहिए लेकिन जो भी निर्णय लेना है, वह प्रशासन को ही लेना है।
खेर नहीं चाहती वापस लिया जाए वोटिंग अधिकार
सांसद किरण खेर का कहना है कि मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि अभी भाजपा के पास 15 से 20 साल नगर निगम में सत्ता रहनी है। ऐसे में मनोनीत की अगली बार जरूरत पड़ सकती है। पार्टी में कोई एक व्यक्ति विरोध करता है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
'नहीं मिलना चाहिए वोटिंग का अधिकार'
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
- फोटो : फाइल फोटो
नहीं मिलना चाहिए वोटिंग का अधिकार
सेक्टर-40 ए की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दलविंदर सैनी का कहना है कि मनोनीत को वोटिंग का अधिकार नहीं देना चाहिए उनका कहना है कि जब शहरवासियों ने अपना समर्थन भाजपा को दे दिया है तो भाजपा ही मेयर बनाए। मनोनीत को मत का अधिकार देना लोकतंत्र का हनन है। जबकि निर्वाचित पार्षदों के पास ही यह अधिकार होना चाहिए क्योंकि लोगों द्वारा उन्हें ही चुनकर भेजा गया है।
मेयर की प्रशासक के साथ बैठक
नगर निगम के मेयर अरुण सूद की गवर्नर हाउस में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ बैठक हुई है। मेयर का कहना है कि यह औपचारिक बैठक थी, जिसमें शहर के मुद्दों पर ही चर्चा की गई। मेयर का कहना है कि शहर में चल रहे प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई है।