नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षदों का 9 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करने का सपना टूट गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार के मामले में स्टे नहीं दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी। अब उस दिन बहस होगी।
अगर मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार मिल जाता है तो मेयर चुनाव की राजनीति बदल जाती, क्योंकि नगर निगम के 9 मनोनीत पार्षदों में से 5 को भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन की सिफारिश पर ही बनाया गया था। 1997 से 2017 तक हर चुनाव में मनोनीत पार्षदों ने वोटिंग का प्रयोग किया है। यह पहला मेयर चुनाव होगा जिसमें वे मतदान नहीं करेंगे। मनोनीत पार्षद को वोटिंग अधिकार न मिलने से अब मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और भाजपा के बागी उम्मीदवारों के बीच होगा।
सुनवाई के दौरान भाजपा के पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह अपने वकील के साथ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे। स्टे न मिलने पर सतिंदर सिंह ने इसे शहरवासियों की जीत बताया है। मालूम हो कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले साल सतिंदर सिंह की याचिका पर ही सुनवाई करते हुए मनोनीत पार्षदों के वोटिंग अधिकार को खारिज किया था। इस पर प्रशासन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई देखने के लिए मेयर आशा जसवाल के बेटे बृजेश्वर जसवाल भी दिल्ली पहुंचे थे। बृजेश्वर जसवाल भी पेशे से वकील हैं।