शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम द्वारा शुरू की गई मुहिम पर दोबारा ब्रेक लग गई। निगम मुलाजिमों ने वीरवार को अपना काम पूरी तरह बंद रखा।
वहीं, निगम अफसरों ने आरोपियाें के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा है।
वहीं, मुलाजिमों ने कहा है कि जब तक पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है, तब पशु पकड़ने की मुहिम को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा।
वीरवार सुबह मुलाजिम फील्ड में जाने की बजाय निगम ऑफिस पहुंचे। इसके बाद मुलाजिमों ने निगम के उच्च अधिकारियों से मुलाकात की।
फिर निगम के एसई बीडी सिंगला ने मुलाजिमों पर लगातार हो रहे हमलों की रिपोर्ट बनाकर एसएसपी को भेजी।
साथ ही उन थानों को कार्रवाई के लिए लिखा गया है जिन क्षेत्रों में यह वारदात हुई है। दूसरी तरफ पशु पकड़ने वाली टीम के इंचार्ज केसर सिंह ने कहा कि पुलिस द्वारा उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
समझौता करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। जबकि, कई बार शिकायत देने के बाद भी आरोपियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गौरतलब है कि बुधवार को फेज-9 में चौथी बार निगम मुलाजिम पर हमला हुआ था। हमले में महिला समेत आठ लोग शामिल थे। सभी आरोपियों की पहचान हो गई थी। इसके बाद भी पुलिस ने कोेेई कार्रवाई नहीं की थी।
जुर्माने की राशि बन रही है हमले की वजह
जब भी नगर निगम की टीम द्वारा कोई पशु पकड़े जाते हैं तो मालिक को दोबारा जुर्माना राशि भरने के बाद ही पशु दिए जाते हैं।
निगम ने जुर्माने की राशि पशुओं के आकार को रखकर तय की है। जो कि 750 से तीन हजार रुपये के बीच में हैं। जुर्माना राशि भरने में पशु मालिकों को मुश्किल आती है।
इसके चलते ही वे इस तरह के कदम उठाते हैं। गौरतलब है कि निगम ने पिछले दिनों जुर्माने के रूप में करीब एक लाख रुपये इकट्ठा किया था। जो कि तय तारगेट से काफी अधिक था।
1500 के करीब हैं लावारिस पशु
शहर में 1500 के करीब के लावारिस पशु हैं। इनकी सबसे अधिक संख्या नए सेक्टरों व फेज-11, 10 और 9 में है। जबकि, इन पशुओं को पकड़ने के लिए छह मुलाजिमों की टीम काम रही है। वहीं, मई से लेकर अक्तूबर तक जिले में तीन लोग पशुओं के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।