-सुप्रीम कोर्ट ने 2022-23 सत्र से स्कूलों में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति का दिया था आदेश
-विशेष शिक्षकों के अभाव में दिव्यांग छात्रों से छिन रहा है शिक्षा का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के स्कूलों में 10000 दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षकों की व्यवस्था न होने की दलील देते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए विकलांग संघ उमंग सिरसा ने एडवोकेट सार्थक गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा के स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्पेशल एजुकेशन के लिए विशेष शिक्षकों का अभाव है। 28 अक्तूबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने रजनीश कुमार पांडे बनाम केंद्र सरकार मामले में दिव्यांग विद्यार्थियों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए थे। इसके अनुसार विशेष स्कूलों में विद्यार्थियों व शिक्षकों का अनुपात तय किया जाए और आम स्कूलों में भी विशेष शिक्षकों की व्यवस्था की जाए। स्कूलों में अन्य स्टाफ को भी दिव्यांग बच्चों को लेकर प्रशिक्षण दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्यों को इसके लिए 2022-23 सत्र तक की मोहलत दी थी। इसके बाद 21 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार ने इसके लिए आवश्यक अधिसूचना जारी की थी। इस सब के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर स्टेट कमिशन फॉर पर्सन विद डिसएबिलिटी के समक्ष मांगपत्र दिया गया था। कमिशन ने 31 मार्च 2023 को राज्य सरकार को आदेश दिया था कि विशेष शिक्षकों की नियमित नियुक्ति स्कूलों में की जाए और ऐसे 1380 शिक्षकों की अनुबंध पर नियुक्ति करने के निर्णय पर दोबारा विचार किया जाए। विशेष शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर राहत दी जाए। इस सब के बावजूद अभी तक स्कूलों में विशेष शिक्षक नहीं हैं और सरकार इनकी नियुक्ति करने की दिशा में कोई काम नहीं कर रही है। याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।