चंडीगढ़। पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने को लेकर प्रधानमंत्री की अपील के बीच चंडीगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि चंडीगढ़ में अब तक न मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू हो पाई और न ही कोई बड़ा वैकल्पिक ट्रांजिट सिस्टम विकसित हुआ। ऐसे में निजी वाहनों की निर्भरता कम करना आसान नहीं है। लोगों का कहना है कि फिलहाल चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) की बसें ही सार्वजनिक परिवहन का मुख्य सहारा हैं।
वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक और करीब 80 डीजल बसें संचालित हो रही हैं। इन बसों में प्रतिदिन लगभग 1.32 लाख यात्री सफर करते हैं। सीटीयू अधिकारियों के अनुसार जून तक 40 नई बसें और शामिल होने की संभावना है, जिससे फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी और यात्रियों को राहत मिलेगी। सीटीयू निदेशक अविकेश गुप्ता ने कहा कि नई बसों के आने के बाद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी।
मोहाली में नौकरी करने वाले नितिन का कहना है कि बस सेवा होने के बावजूद रोजमर्रा के कई कामों के कारण कार का उपयोग जरूरी हो जाता है। वहीं मोहाली निवासी रिंकू जैन ने कहा कि उन्हें खरड़ से रोजाना चंडीगढ़ आना पड़ता है और एक दिन में कई स्थानों पर जाना होता है। ऐसे में निजी वाहन ही सुविधाजनक विकल्प बचता है। उनका कहना है कि यदि मेट्रो जैसी सुविधा होती तो लोग निजी वाहन कम इस्तेमाल करते। जीरकपुर निवासी सुरभि ने बताया कि वह रोजाना बस से चंडीगढ़ आती हैं। उनके अनुसार यदि बसों की संख्या और फ्रीक्वेंसी बढ़ा दी जाए तो लोग आसानी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर आकर्षित हो सकते हैं।