मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत जनरल अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली आधा दर्जन बीमारियों की रूटीन मेडिसिन कई सप्ताह से खत्म है। चेकअप के बाद डॉक्टर ये दवाएं तो लिख देते हैं, लेकिन मरीजों को बाजार से ही ये दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
इनमें थॉयराइड, यूरोलॉजी, हाइपरटेंशन, सहित कई बीमारियों की दवा शामिल हैं। मरीजों को हो रही दिक्कतों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन गंभीर नहीं है। प्रबंधन अपनी लापरवाही स्वीकार करने की बजाय ओपीडी में बढ़ रही मरीजों की संख्या को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
ये मेडिसिन नहीं हैं अस्पताल में
बीमारी--------------मेडिसिन
हड्डियों में दर्द-------पेन किलर ट्यूब
कोलेस्ट्रॉल----------एटोवास
हार्ट---------------इकोस्प्रिन व अन्य
थाइराइड-----------एल्ट्रॉक्सिन (महंगी)
यूरोलाजिस्ट---------एक भी मेडिसिन नहीं
गायनी से जुड़ी-------हॉरमोनल टैबलेट्स
आंखों से जुड़ी---------बाहर से ही खरीदनी पड़ती है
(इसके अलावा यूरिक एसिड और यूरोलोजी से संबंधित एक भी मेडिसिन अस्पताल में उपलब्ध नहीं है)
कोट्स
ऐसा हो ही नहीं सकता कि अस्पताल में मेडिसिन उपलब्ध नहीं हो। यदि ऐसा है तो मरीजों को डाक्टर से दोबारा मिलना चाहिए, ताकि दूसरी अल्टरनेटिव मेडिसिन लिख सकें। ये मेडिसिन जरूर उपलब्ध होंगी। शुक्रवार को मेडिसिन की लिस्ट की जांच की जाएगी और स्टॉक से खत्म मेडिसिन को मंगवाया जाएगा।
- डा. ऊषा गुप्ता, पीएमओ, जनरल अस्पताल