चंडीगढ़। पेरिस ओलंपिक में बैडमिंटन में पदक नहीं आने से उम्मीदों को झटका लगा है। इसके लिए केवल खिलाड़ी जिम्मेदार नहीं है। कहीं न कहीं सिस्टम का फेलियर है। यह चिंता का विषय है। उम्मीद है कि इस पर बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और सरकार गहराई से मंथन करेगी ताकि बैडमिंटन का खेल भविष्य में मजबूत होकर उभरे। यह बात अर्जुन अवॉर्डी व द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित कोच पुलेला गोपीचंद ने कही। वे रविवार को सेक्टर-38 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में नॉर्थ जोन बैडमिंटन चैंपियनशिप के आखिरी दिन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
गोपीचंद ने कहा कि हर गेम हर प्लेयर अलग होता है। हमारी बेहतर तैयारी और फोकस होना चाहिए। उम्मीद है कि हम उन गलतियों पर काम कर आगे की राह तय करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले ओलंपिक के लिए खेल की योजना पर काम शुरू हो गया है। पेरिस ओलंपिक में लक्ष्य सेन के मुकाबले काफी नजदीकी रहे हैं। उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया। पिछले तीन ओलंपिक में देश को पदक मिले थे लेकिन इस बार एक भी मेडल नहीं आया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्पोर्ट्स में काफी योगदान दिया है चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्चर हो या इनामी राशि।
देश में बेहतर कोचों का होना सबसे महत्वपूर्ण
देश में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही बेहतरीन कोच होना जरूरी है,क्योकि कोच वही जो बेहतरीन रिजल्ट दे सकता है। इसके लिए कोचो को खेल की बारीकियों पर अधिक फोकस करना चाहिए,इसके साथ ही कोच व खिलाड़ियों में तालमेल होना जरूरी है। इसको लेकर भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ध्यान दे रही है उन्होंने कहा कि अब देश में 100 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना दो, लेकिन अगर वहां पर बेहतर कोच नहीं होगा तो खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। क्योंकि बिना कोच के एक बेहतर तैयार कभी नहीं हो सकता,क्योंकि एक कोच हर खिलाड़ी को तलाशने में अहम भूमिका निभाता हैं।
देश में बढ़ रहा बैडमिंटन के खेल का क्रेज
गोपीचंद ने कहा जब हम लोग खेला करते थे तो कैंप में 50 खिलाड़ी ही होते थे, लेकिन थॉमस कप में भारत की जीत के बाद बैडमिंटन खिलाड़ियों का ग्राफ एक दम से बढ़ने लगा है। अब हर आयु वर्ग में राष्ट्रीय कैंप में 500 से अधिक खिलाड़ी प्रतिभा को निखारने पहुंच रहे हैं। आज कई युवा बैडमिंटन खिलाड़ी देश के लिए खेलने के लिए लाइन में खड़े हैं।
पैरा खिलाड़ियों से प्रेरणा लेनी चाहिए
गोपीचंद ने कहा कि इस बार देश के पैरा खिलाड़ियों ने पेरिस में शानदार प्रदर्शन कर मेडल हासिल किए हैं। हम सभी को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए, क्योंकि इन्होंने शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद अपने हौसले में किसी तरह की कोई कमी नहीं आने दी। ओलंपिक में पदक जीत देश का नाम रोशन किया। इन खिलाड़ियों के जज्बे को सलाम करता हूं।