चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने नौ हजार से अधिक छात्रों की डिग्रियां जारी करने के आदेश जारी किए हैं। कहा है कि जिन्होंने परीक्षा शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें डिग्रियां दी जा सकेंगी। इसके साथ ही जिन छात्रों ने शुल्क जमा नहीं किया, उन पर पीयू ने कोई निर्णय नहीं लिया।
पीयू के शिक्षाविदों का कहना है कि सहारा उन्हें दिया जाता है जो कमजोर है। परीक्षा शुल्क पहले ही जमा कर चुके छात्र सक्षम थे और निर्णय भी उन्हीं के लिए लिया गया, जबकि दो से तीन हजार छात्रों ने शुल्क जमा नहीं किया, क्योंकि वह बेहद गरीब हैं और वे केवल छात्रवृत्ति के बलबूते कॉलेजों तक पहुंचे हैं। तीन साल बाद हुई बैठक में इन छात्रों के बारे में सोचा जाना चाहिए था जो नहीं किया गया। हालांकि पीयू कॉलेजों से इस संबंध में संपर्क साधने की बात कर रहा है।
21 करोड़ बकाया है पीयू का पंजाब सरकार पर
केंद्र सरकार एससी-एसटी के विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति देती है, जिसके सहारे से वे उच्च शिक्षा पाते हैं। यह रकम पंजाब सरकार को भी मिली, लेकिन पंजाब के 194 कॉलेजों तक नहीं पहुंची। सरकार पर पीयू का लगभग 21 करोड़ रुपये बकाया हो गया। इस बीच पीयू ने इन छात्रों की डिग्रियां व डीएमसी रोक दी। छात्रों को परेशानी होने लगी। इसका दर्द न तो पीयू को हुआ और न सरकार को और छात्र हर दिन डिग्रियों के लिए जहां-तहां दौड़ लगाते रहे। पीयू को पैसे चाहिए थे और पंजाब सरकार बिना पैसे दिए छात्रों को डिग्रियां दिलाने की बात कर रही थी।
पीयू के इस निर्णय का लाभ गरीब छात्रों को नहीं मिलेगा
अब छात्रों का दबाव पड़ा तो पीयू कमेटी ने बैठक की और वही निर्णय किया जो तीन से चार साल पहले हो जाना चाहिए था। पीयू के अधिकारियों ने कहा है कि 90 फीसदी छात्रों ने परीक्षा शुल्क जमा कर रखा है। ऐसे में ये छात्र डिग्रियां ले सकते हैं। जानकारों का कहना है कि जब छात्रों ने शुल्क जमा कर रखा था तो पीयू ने यह निर्णय इतनी देरी से क्यों लिया। उन छात्रों को इस लाभ से वंचित क्यों रखा गया, जिनके पास परीक्षा शुल्क जमा करने के पैसे नहीं हैं। पीयू के शिक्षाविदों का कहना है कि गरीब छात्रों को इस बैठक के निर्णय का लाभ नहीं मिलेगा। इसके बारे में पीयू के परीक्षा नियंत्रक विभाग को आंख खोलकर सोचना चाहिए था, जो नहीं सोचा गया।