लीचेट और बदबू के कारण डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों को सांस की समस्या, त्वचा रोग, टीबी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इलाके में वातावरण इतना दूषित हो गया है कि सांस लेना मुश्किल हो गया है। सड़कों पर फैले इस रसायनिक पानी से सड़कें फिसलन भरी और दुर्घटनाओं के लिए खतरनाक हो गई हैं।
31 मई को तक कूड़े का पहाड़ हटाना था
नगर निगम ने पहले डंपिंग साइट को 31 मई 2025 तक साफ करने का वादा किया था लेकिन उसी दिन साइट पर भीषण आग लग गई जिसे बुझाने में 1.25 लाख लीटर पानी खर्च हुआ। इसके बाद सफाई की समय-सीमा जुलाई तक बढ़ा दी गईमगर अब तक वहां से कूड़ा नहीं हटाया गया है।