स्थानीय निकाय के दायरे में इंडस्ट्री, अस्पताल और होटल बनाने के लिए लोगों को अब चेंज ऑफ लैंड यूज करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्थानीय निकाय विभाग ने विकास में तेजी लाने और लोगों को राहत देने को योजना का खाका तैयार कर लिया है।
विभाग ने रीयल इस्टेट कारोबारियों को भी राहत देने के लिए कदम उठाए हैं। ग्रुप हाउसिंग पर लगने वाले तमाम चार्ज का रेशनलाइजेशन किया गया है। चुनाव आचार संहिता हटने के बाद इस संबंधी नोटीफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।
अभी नगर निगम के दायरे में इंडस्ट्री, अस्पताल या होटल बनवाने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज कराना जरूरी है। जिसकी फीस कलेक्टर रेट के मुताबिक ली जाती है। एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) भी देने पड़ते हैं। इसे देखते हुए निकाय विभाग ने इन पर चेंज ऑफ लैंड यूज की शर्त हटाने का फैसला किया है।
विभाग का मानना है कि इससे ईडीसी चार्ज की रिकवरी में बढ़ोतरी होगी और अवैध निर्माण रुकेगा। साथ ही निकाय विभाग ने बुरे हालात से गुजर रहे रीयल इस्टेट कारोबारियों को भी राहत देने का फैसला किया है।
ग्रुप हाउसिंग, कॉलोनियों और कामर्शियल बिल्डिंग के लिए सीएलयू, ईडीसी, प्रोसेसिंग फीस और लाइसेंस फीस का रेशनलाइजेशन किया गया है। इसे हाउसिंग विभाग द्वारा ली जाने वाली फीस के बराबर कर दिया है। इससे मौजूदा फीस में पचास फीसदी तक की राहत मिलेगी।
इससे अब नगर निगम के दायरे केअंदर और बाहर के चार्ज लगभग समान हो जाएंगे। इस बारे में संपर्क करने पर स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण वह इस संबंध में कोई ऐलान नहीं कर सकते।