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कथक की झंकार के साथ प्राचीन कला केंद्र में नववर्ष का आगाज

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चंडीगढ़। प्राचीन कला केंद्र की ओर से नववर्ष के आगमन पर शुक्रवार शाम को 29वीं वेब बैठक कर ‘शुभारंभ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नववर्ष पर कार्यक्रम का आगाज कथक की झंकार के साथ हुआ। इस दौरान प्राचीन कला केंद्र की डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. समीरा कौसर ने प्रस्तुति दी।
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कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. समीरा ने श्लोक के द्वारा ब्रह्मा, विष्णु और गुरू का वंदन किया। इसके बाद डॉ. समीरा ने कथक का तकनीकी पक्ष पेश किया। इसमें उन्होंने थाट, उपज, उठान, तोड़े, टुकड़े, परन, तिहाई, चालें, लड़ी, कायदे, त्रिपल्ली परन और लंबछार परन का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के अंतिम भाग में डॉ. समीरा ने महान कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता किसान पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके बोल थे ‘बरसा रहा है रवि अनल भूतल तवा सा जल रहा’। इस कविता के माध्यम से डॉ. समीरा ने भाव पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया। किसानों के प्रति कवि के मन के भावों को नृत्य के माध्यम से पेश करके समीरा ने संघर्षरत किसानों को समर्थन दिया।
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