राजस्थान में तैयार की गई चना बीज की नई वैरायटी जीएनजी-2171 से हरियाणा के किसानों की जेब भरने वाली होगी। हरियाणा बीज विकास निगम लिमिटेड इसी साल नई वैरायटी को चना उत्पादक किसानों के हाथों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। चने की यह किस्म राजस्थान के गंगानगर शोध संस्थान में विकसित की गई है।
हरियाणा बीज निगम को अनुमान है कि बेहतर परिणाम आने के बाद किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जीएनजी-2171 को अपना सकते हैं। वहीं, हरियाणा बीज विकास निगम ने साल 2023 में एक हजार क्विंटल बीज मार्केट में लाने के लिए तैयारी की हुई है। राजस्थान से शोध संस्थान से इस किस्म को लेने के बाद निगम इसका बीज तैयार कर रहा है। हरियाणा बीज विकास निगम लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक सुनील कुमार के अनुसार जीएनजी-2171 गंगानगर शोध संस्थान राजस्थान में तैयार हुई एकदम नई किस्म है। किसानों को यह बीज 10 से 11 हजार रुपये प्रति क्विंटल,यानी 10 से 11 रुपये प्रति किलो दाम में उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 16 किलोग्राम बीज की पड़ेगी। पुराने बीजों से एक एकड़ में होती थी छह से आठ क्विंटल चने की पैदावार होती थी,लेकिन जीएनजी-2171 से किसान 8 से 10 क्विंटल पैदावार देने में सक्षम है।
5 वर्ष में पहली बार 60 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य
हरियाणा कृषि विभाग के आंकड़ों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो पांच साल में चना खेती का रकबा बढ़ने के साथ 2022-2023 में वर्ष 1918 के मुकाबले दुगनी से भी ज्यादा यानी 60 हजार मीट्रिक टन चने की पैदावार का लक्ष्य हरियाणा में रखा गया है। हरियाणा में 2018 से 2021 तक कई बार चने की खेती का रकबा घटा और बढ़ा है।
2018-2019
एरिया- 44 .92 हजार हेक्टेयर
उत्पादन-62.22 हजार मीट्रिक टन
2019-2020
एरिया- 43.97 हजार हेक्टेयर
उत्पादन-47.09 हजार मीट्रिक टन
2020-2021
एरिया- 35 .69 हजार हेक्टेयर
उत्पादन-35.87 हजार मीट्रिक टन
2021-2022
एरिया- 38 हजार हेक्टेयर
उत्पादन-45.37 हजार मीट्रिक टन
2022-2023
एरिया-60 हजार हेक्टेयर
लक्ष्य-96 मीट्रिक टन