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Chandigarh News: ईको सिटी में लगेगा नया एसटीपी, 17 करोड़ होंगे खर्च

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मोहाली। ईको सिटी बसने के दौरान आबादी कम थी इसलिए गमाडा ने वहां पर 300 केएलडी (किलो लीटर प्रतिदिन) क्षमता का पोर्टेबल एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लग रखा था। इससे ईको सिटी-1 से निकले वाले सीवरेज को साफ किया जा रहा था लेकिन अब वहां पर ईको सिटी-2 और ईको सिटी-3 का विस्तार होने के बाद भविष्य की जरूरतों को देखते हुए गमाडा ने 17 करोड़ रुपये से एसटीपी लगाने का टेंडर दे दिया है।
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विभाग के अनुसार, एक साल में यह एसटीपी बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बनने के बाद इलाके में सीवरेज जाम की जो समस्या चल रही है उससे निजात मिलेगी। सीवरेज जाम की लोगों की आए दिन शिकायतें मिलने के बाद अधिकारियों ने इलाके का दौरा कर इसके हल के लिए योजना बनानी शुरू की थी। इसके बाद अब गमाडा ने टेंडर निकालकर एक कंपनी को दे दिया है। वह कंपनी एक साल में एसटीपी बनाकर देगी। इस एसटीपी की क्षमता चार एमलीडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) होगी। इलाके में अस्थायी एसटीपी लगाकर काम चलाया जा रहा था लेकिन अब आबादी बढ़ने के बाद गमाडा ने स्थायी एसटीपी लगाने का फैसला किया और अब इसका टेंडर एक निजी कंपनी को देकर काम शुरू करवा दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले एक साल बाद यह एसटीपी काम करना शुरू कर देगा। इसके बाद अस्थायी पोर्टेबल एसटीपी को वहां से हटाकर कहीं और लगाया जाएगा।



10 साल के लिए एसटीपी का करना होगा रखरखाव

इस टेंडर की शर्तों के अनुसार कंपनी को एसटीपी बनाने के साथ ही 10 साल के लिए इसका रखरखाव भी करना होगा। वहीं, एसटीपी पर स्टाफ भी कंपनी का होगा। एसटीपी बनने से इलाके में सीवरेज जाम की समस्या दूर हो जाएगी। इलाके के लोग लंबे समय से वहां स्थायी एसटीपी की मांग कर रहे थे।
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शॉपिंग स्ट्रीट की ड्रेनेज लाइन में गंदगी डालने से नहीं होती बरसाती पानी की निकासी

फेज-5 से फेज-7 तक की शॉपिंग स्ट्रीट में खाने-पीने की काफी दुकानें हैं। यहां के दुकानदार अपनी दुकानों की गंदगी बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाई ड्रेनेज लाइन में डाल देते हैं। इस कारण यह लाइन हमेशा बंद रहती है। बुधवार को बारिश के बाद इस ड्रेन लाइन से बरसाती पानी की निकासी न होने के चलते सड़क के साथ ही पार्किंग में भी पानी भर गया था। दुकानदारों ने कहा कि बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण पार्किंग में पानी भरने से ग्राहकों को आने में परेशानी होती है।



ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रही गंदगी

शहर में सीवरेज सिस्टम की हालत बेहद खराब है। रोज कहीं न कहीं सीवरेज लाइन ब्लॉक होने की शिकायत आ ही जाती है। बरसात के दिनों में सीवरेज जाम होने की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। शहर में जगह-जगह सीवरेज लाइनें ओवरफ्लो हो रही हैं। शहर का दौरा किया जाए तो अभी भी सीवरेज का पानी कई जगह सड़कों पर बहता दिखाई दे जाएगा।



एसटीपी की क्षमता कम होने पर खरड़ और जीरकपुर में नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर लगा रखी है पाबंदी

खरड़ और जीरकपुर में नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने दोनों शहरों में जीरो अनट्रीटेड डिस्चार्ज को सुनिश्चित न कर पाने पर स्थानीय निकाय विभाग को नए सीवरेज ट्रीटमेंट (एसटीपी) लगने तक दोनों शहरों में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने पर रोक लगाने को कहा था। बता दें कि चंडीगढ़ के साथ सटे होने के चलते इन दोनों शहरों में लोग भूमि खरीदने और घर बनाने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। इन इलाकों में आबादी का भार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। यहां बढ़ी आबादी के हिसाब से एसटीपी अभी नहीं बढ़ पाए हैं। अभी एक एसटीपी जीरकपुर और एक खरड़ में लगा है। ये दोनों मौजूदा जल प्रदूषण भार से निपटने में असमर्थ हैं क्योंकि इन दोनों शहरों में सीवरेज वेस्ट निकलने और ट्रीट होने में 17 एमएलडी का अंतर है।



बिना एसटीपी बन रहे हैं कई प्रोजेक्ट

इलाके में कई प्रोजेक्ट में एसटीपी नहीं लगे हैं। इस कारण भी प्रशासन के एसटीपी पर बोझ बढ़ रहा है। नियमों के अनुसार अगर सभी प्रोजेक्ट में एसटीपी लगाना अनिवार्य है। कुछ प्रोजेक्ट में ही एसटीपी लगे हैं लेकिन वे भी इसे नहीं चलाते हैं क्योंकि एसटीपी चलाने की लागत ज्यादा है। इस कारण बिल्डर्स बिना ट्रीट किया पानी सरकारी लाइन में डाल देते हैं। इस कारण भी सरकारी एसटीपी पर भार पड़ रहा है। अगर बिल्डर्स अपने प्रोजेक्ट में से निकलने वाला सीवरेज वेस्ट एसटीपी से ट्रीट करके डालें तो यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। लोगों का कहना है कि इस बारे में प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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