पीजीआई के ठेके पर लगे कर्मचारी संस्थान की नीतियों से शोषित हो रहे हैं। एक तो छुट्टी वाले दिन उनकी तनख्वाह काट दी जाती है तो वीरवार से उनके सामने एक और मुश्किल खड़ी कर दी गई।
वीरवार से कांट्रैक्ट लेबर के वाहनों की एंट्री स्टाफ पार्किंग पर बैन कर दी गई। इससे न्यू ओपीडी के बाहर करीब एक घंटे तक हंगामे की स्थिति रही।
कांट्रैक्ट लेबरों ने पार्किंग के बाहर अपने वाहन खड़े कर दिए। कर्मचारियों के नहीं पहुंचने से न्यू ओपीडी के काउंटर भी प्रभावित रहे।
कई जगह काउंटर खुले ही नहीं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें बताया कि उन्हें आदेश दिया गया है कि सिर्फ उन्हीं वाहनों की एंट्री की जाएगी, जिनके वाहनों पर पीजीआई का स्टीकर लगा हुआ होगा।
कांट्रैक्ट लेबरों को पार्किंग के लिए कोई स्टीकर नहीं मिलता। उसके बाद उनसे कहा कि वे अपना आइडेंटी कार्ड दिखाएं।
अधिकतर कर्मचारियों के आइडेंटी कार्ड काउंटर के लाकर में रखे थे। सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि यदि वाहनों को खड़ा करना है तो इसके लिए ठेकेदार से पास बनवाने होंगे, तभी उनके वाहनों की एंट्री होगी।
दोनों वर्ग अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे। इस बीच इसकी सूचना ज्वाइंट मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. विकास मेधी के पास पहुंच गई। वे मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव किया।
उन्होंने कांट्रैक्ट लेबर को आश्वासन दिया कि उनकी समस्या एक दो दिन में सुलझ जाएगी, तब तक वे स्टाफ पार्किंग में अपने वाहन खड़े कर सकेंगे।
लेबरों का कहना है कि एक तो पहले से ही पीड़ित हैं। उन्हें डीसी रेट पर ही सैलरी दी जाती है, काम जरूरत से ज्यादा लिया जाता है।
3500 से हैं पीजीआई में कांट्रैक्ट लेबर
पीजीआई में 3500 से ज्यादा कांट्रैक्ट लेबर हैं। इनमें काउंटर क्लर्क, हास्पिटल अटेंडेंट, सेनेटरी अटैंडेंट, नर्सिंग स्टूडेंट सहित कई लोग शामिल है।
पीजीआई कांट्रैक्ट वर्कर यूनियन के प्रधान संजीव कुमार व प्रेस सेक्रेटरी पीएस बदन ने बताया कि उनकी एंट्री आठ बजे होती है, लेकिन नए तुगलकी फरमान के कारण वीरवार को उन्हें साढ़े नौ बजे के बाद जाना पड़ा।
इससे मरीजों को परेशानी आई। उनका कहना है कि वे पिछले 15 साल से पीजीआई के साथ जुड़े हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें पार्किंग के लिए रुपये देने पड़े तो इतनी साल सेवा करने क्या मायने?
उन्होंने बताया कि बाद में ज्वाइंट मेडिकल सुपरीटेंडेंट की ओर से मैसेज आया कि इस मामले का निपटारा वे 30 के बाद करेंगे, तब तक उन्हें पार्किंग में वाहन खड़ा करने से कोई नहीं रोकेगा।
पीजीआई की प्रवक्ता मंजू वडवालकर ने बताया कि कांट्रैक्ट लेबरों को पार्किंग के लिए ठेकेदारों की ओर से पास जारी किया जाता है। ये पास काफी रियायत दरों में बनते हैं।
पीजीआई में दिन पर दिन पार्किंग का स्पेस कम होता जा रहा है। ऐसे में यहां के स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। फिलहाल इस बारे में विचार किया जा रहा है।