चंडीगढ़। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किए गए सुधार न केवल परिवर्तनकारी हैं बल्कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली के व्यापक बदलाव का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नई शिक्षा नीति भारत को भविष्य में एक महाशक्ति बनने में मदद करेगी। यह बात हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कही। वे शुक्रवार को पीयू में नई शिक्षा नीति पर आयोजित वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि सम्मलित हुए। यह कार्यक्रम पीयू सामुदायिक शिक्षा और विकलांगता अध्ययन विभाग की ओर से आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि मुझे आशा है कि इस नीति से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह नीति ब्रेन ड्रेन को कम करने में भी मदद करने वाली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत पर केंद्रित है जो भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एक पूर्ण परिवर्तन लाएगी। आज भारत सरकार ने 34 वर्षों के बाद देश में नई शिक्षा नीति को लागू किया है।
पीयू वीसी प्रो. राज कुमार ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी ने पहले ही नई शिक्षा नीति के लघु और दीर्घकालिक कार्यान्वयन की योजना बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने संसाधनों के आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के साथ सहयोग पर भी जोर दिया। इससे पूर्व डीयूआई प्रो. आरके सिंगला ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। यूआईएचटीएम के प्रोफेसर प्रशांत गौतम ने सभी का आभार जताया।
नई शिक्षा नीति की चुनौतियों पर बातचीत
उधर, पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स- 42 में हुए वेबिनार में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और लोक प्रशासन : अवसर, प्रासंगिकता और चुनौतियां पर बातचीत हुई। डॉ. एस. कटारिया, लोक प्रशासन विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर मुख्य वक्ता रहे। कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर बीनू डोगरा ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। निदेशक डॉ. नेमी चंद, डॉ. आभा सुदर्शन, जगननाथ, डॉ. शैलेंद्र, मोहित, डॉ. प्रीति शारदा आदि ने भाग लिया।