अधिकारियों ने बताया कि जिस जगह पर डैम बनना है, उसके स्थान का चयन कर लिया गया है। यह करीब 5400 एकड़ भूमि में बनेगा। अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों में ज्यादा पानी आने की स्थिति में हथिनी कुंड बैराज के गेट खोले जाते हैं। बांध बनने के बाद यदि ऐसी स्थिति आती है तो हथिनी कुंड बैराज के पानी को इस बांध में लाया जाएगा। इसके जलाशय की क्षमता 10.82 क्यूसिक होगी।
यह मिलेगा लाभ
अधिकारियों का कहना है कि इस बांध के बनने के बाद न सिर्फ हरियाणा बल्कि यूपी, हिमाचल व दिल्ली को भी लाभ मिलेगा। बांध बनने से हरियाणा के साथ यूपी व दिल्ली को भी बाढ़ से छुटकारा मिलेगा। वहीं, पानी की उपलब्धता से 250 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बांध के जलाशय के पानी से आसपास की नहरों में सिंचाई के पानी की तीव्रता में सुधार होगा। वहीं, जलाशय के पानी से रबी और खरीफ फसल की सिंचाई हो सकेगी। सिंचाई के पानी का लाभ यूपी को भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त हर साल करोड़ों रुपये की राशि बाढ़ रोकथाम कार्यों पर जो खर्च की जाती है, उसकी भी बचत होगी।
बाढ़ पर दिल्ली व हरियाणा के बीच हो चुका टकराव
बीते महीने जुलाई में हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने पर दिल्ली व हरियाणा सरकार के बीच टकराव बन गया था। दोनों सरकारों के बीच काफी बयानबाजी हुई थी। केजरीवाल सरकार ने आरोप लगाया था कि पड़ोसी राज्य ने हथिनीकुंड से ज्यादा पानी छोड़ा था, जिससे दिल्ली में बाढ़ का पानी घुस गया था। वहीं, आईटीओ बैराज के मुद्दे पर भी दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था। इस मुद्दे पर हरियाणा ने पिछले दिनों चीफ इंजीनियर को निलंबित कर दिया था।