हाल ही में प्रशासन की ओर से हटाई गई नेहरू कालोनी में रहने वाले प्रेम शंकर की मां जया देवी को पुनर्वास प्लाट के लिए बनाए गए कागज के वेरिफिकेशन के लिए विशेष तौर पर बिहार के सीतामढ़ी से बुलाया गया। जब वे यहां पहुंचीं तो रोजाना उन्हें सेक्टर 42 स्थित एसडीएम आफिस बुलाया जाता रहा।
लगातार चार दिन तक उन्हें एसडीएम दफ्तर बुलाया गया, लेकिन न तो उनके कागजात की जांच की गई और न ही उनकी बात सुनी गई। कालोनी उजड़ने से ठीक एक दिन पहले जब वे एसडीएम दफ्तर से लौट रही थीं, तभी वे गश खाकर नीचे गिर गईं और उनके सिर पर गंभीर चोट आ गईं।
पहले उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां इलाज में भारी भरकम खर्चा होने की वजह से परिजन उन्हें सेक्टर-16 के हॉस्पिटल ले आएं। वहां से उन्हें जीएमसीएच-32 भेज दिया गया। बाद में वहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया।
इमरजेंसी में दाखिल जया देवी की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। पीजीआई ने फिलहाल उनका ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। उनके बेटे प्रेम शंकर ने बताया कि उन्होंने पिता के नाम पर पुनर्वास प्लाट स्कीम के तहत आवेदन किया था। पिता के निधन के बाद उनकी मां बिहार के सीतामढ़ी चली गईं।
आवेदन की जांच के लिए अफसरों ने उनकी मां को बिहार से बुलाया था। जब वे चंडीगढ़ पहुंचीं तो अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी और काफी चक्कर लगवाए।
आम आदमी पार्टी के वालंटियर व पूर्व डीएसपी विजयपाल का कहना है कि जया देवी की हालत के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ही जिम्मेदार है। यदि प्रशासन इस मामले में संवेदनशीलता बरतता तो आज यह स्थिति नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को ऊपर तक लेकर जाएंगे।