चंडीगढ़। देश में कोरोना वायरस ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कई राज्यों ने सतर्कता बढ़ा दी है। लेकिन सिटी ब्यूटीफुल में कोरोना को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। आलम यह है कि लोगों के चेहरे से मास्क गायब हो गए हैं। साथ ही सामाजिक दूरी की धज्जियां भी उड़ रही हैं। सुखना लेक, रॉक गार्डन और बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों को मास्क के बिना देखा जा सकता है। अगर ऐसी ही लापरवाही बरती गई तो स्थिति भयानक हो सकती है।
उधर, चंडीगढ़ प्रशासन भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर अब हरकत में आ गया है। पंजाब और हरियाणा की तरह अलर्ट जारी करने की तैयारी की जा रही है। आने वाले कुछ दिनों में प्रशासन सख्तियों का ऐलान कर सकता है। प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन की संख्या कम कर दी है, जिसे फिर से बढ़ाए जाने की संभावना है। हर वीरवार को नए कंटेनमेंट जोन की घोषणा की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोरोना संक्रमण को लेकर अभी सावधानी नहीं बरती तो स्थिति पूर्व से भी ज्यादा भयावह हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि संक्रमण से बचाव के मानकों का कड़ाई से पालन करें, दी गई छूट का फायदा उठाने की बजाय ईमानदारी पूर्वक बचाव के मानकों का पालन करें। उन्होंने मास्क, हाथ धोने व सामाजिक दूरी के तीन मंत्र पालन करने की सलाह दी।
मनोज परिदा ने दिए सख्ती के निर्देश
प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने शहर के धार्मिक स्थलों, शॉपिग मॉल, होटल एवं रेस्टोरेंट, सब्जी मंडी आदि के संचालन में कोविड के नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में आरटी-पीसीआर जांच को बढ़ाया जाएगा। विभिन्न मार्केट व सार्वजनिक स्थलों पर एक समय में लोगों की अधिक भीड़ जमा नहीं हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। केंद्र सरकार ने भी केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त और व्यापक निगरानी के साथ कड़े नियंत्रण पर ध्यान देने, जीनोम सिक्वेंसिंग के बाद परीक्षण के माध्यम से क्लस्टर मामलों की निगरानी और नैदानिक प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि शहर में लोगों के बीच अब कोरोना वायरस का डर खत्म होता जा रहा है। सार्वजनिक स्थलों, शॉपिग मॉल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित चौक चौराहों पर बिना मास्क लगाए लोगों की भीड़ जमा हो रही है।
परिदा बोले- कोरोना का डर हुआ कम, टीकाकरण अभियान में पिछड़े
कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंटलाइन कर्मचारियों की तरफ से खास रुचि नहीं दिखाई जा रही है। इसको लेकर प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने ट्वीट कर कहा है कि लोगों में कोरोना का डर काफी कम हो गया है, जिसकी वजह से लोग टीका नहीं लगवा रहे हैं। बीते दिनों भी परिदा ने कहा था कि अगर स्वास्थ्य कर्मियों व फ्रंटलाइन कर्मचारी अभी मुफ्त में टीका नहीं लगवाते हैं, तो फिर बाद में उन्हें पैसे खर्च कर मार्केट से खरीद कर लगवानी होगी। इस बीच केंद्र ने कोरोना टीकाकरण अभियान में तेजी लाने को कहा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ..
टीकाकरण के साथ सावधानी बेहद जरूरी
कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण की शुरुआत की जा चुकी है। लेकिन इसे लेकर बेहद उदासीन रवैया दिखाया जा रहा है। यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है। टीका लगवाना तभी कारगर साबित होगा, जब हम उसके बाद भी मास्क पहनने, हाथ धोने और दूरी बनाने के नियम का कड़ाई से पालन करेंगे। इसे लेकर की जा रही लापरवाही से ही एक बार फिर स्थिति बिगड़ने की नौबत आ गई है।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य
तीन नियमों का करें पालन.. संक्रमण छू भी नहीं पाएगा
सरकार ने अगर ढिलाई दी है तो हमें उसे सकारात्मक रूप से स्वीकार करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि मानकों को अब भी सावधानी से नियमित रूप से पालन में लाया जाए। घर से बाहर निकलते समय मास्क अनिवार्य रूप से प्रयोग करें। इसके साथ ही हाथ धोने की आदत को भी नियमित रूप से करते रहे। घर से बाहर लोगों से संपर्क स्थापित करते समय सामाजिक दूरी के नियम को कतई ना भूलें। अगर इन तीन नियमों का हमने सावधानीपूर्वक ईमानदारी से पालन कर लिया तो संक्रमण हमें छू भी नहीं पाएगी।
-डॉ. रविंद्र खाईवाल, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआई
अभी डरने में ही सबकी भलाई
संक्रमण बढ़ने को लेकर हैरान होने की जरूरत नहीं है। पहली बार भी इसी तरह से स्थिति खराब होनी शुरू हुई थी। पहली बार की स्थिति पर अगर गौर किया जाए तो विदेशों में संक्रमण फैलने के दो से तीन महीने बाद भारत में स्थिति बिगड़नी शुरू हुई थी। इस बार भी वही स्थिति बनाई जा रही है। अगर पूर्व की स्थिति से बचना है तो इस बार भी कड़े नियम लागू करने होंगे। पहली बार 24 घंटे में विदेशों से उड़ान बंद कर दी गई थी। लेकिन इस बार अब तक ऐसा नहीं किया गया। यह खतरे की तरफ संकेत कर रही है। इसके साथ ही टीकाकरण को लेकर जिस तरह से अनदेखी की जा रही है वह स्थिति भी भयावह साबित हो सकती है। आगामी एक से डेढ़ महीने तक बेहद सावधान रहने की जरूरत है। इस बार के संक्रमण में अभी यह वर्गीकरण करना आसान नहीं होगा कि कौन से वायरस के संक्रमण की चपेट में आए हैं। इससे इलाज में देरी की गुंजाइश होगी। इसलिए डर कर रहने में ही भलाई है।
-डॉ. एस बी बेदी, सलाहकार, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन
सुस्त पड़ी पुलिस को भी होना होगा चुस्त
- जुलाई सबसे ज्यादा चालान काटे, फरवरी में सबसे कम
22671 लोगों का अब तक कटा चालान
चंडीगढ़। कोविड-19 को लेकर पुलिस प्रशासन भी सुस्त पड़ गया है। कोरोना के शुरुआती महीने में मास्क पहनने और सामाजिक दूरी की पालना करवाने की काफी सख्ती बरती थी, लेकिन अब पुलिस भी मास्क का चालान काटने में नरमी बरत रही है। ऐसे में शहर के सुखना झील, मार्केट समेत भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोग जमकर नियमों की नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन महीने में पुलिस ने लगभग 80 फीसदी तक चालान काटने में नरमी बरती है।
कोरोना के बढ़ते मामले को रोकने को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में 24 मार्च 2020 को कर्फ्यू लगा दिया था। इसके बाद जून के आखिरी सप्ताह से नया नियम लागू कर बिना मास्क के सड़कों पर घूम रहे लोगों का चालान काटना शुरू किया गया। चालान को पहले 500 रुपये और फिर 1 हजार रुपये कर दिया गया। आंकड़ों के अनुसार पिछले करीब नौ महीने में चंडीगढ़ पुलिस शहर के अलग अलग हिस्सों में कुल 22,671 चालान किया है। इनमें सबसे ज्यादा चालान जुलाई 5929 और सबसे कम इस माह फरवरी में 1139 चालान किया है। पुलिस ने बताया कि जैसे-जैसे कोरोना के मामले कम होने लगे मास्क का चालान भी कटना कम हुआ है।
कब-कब कितने कटे चालान
साल चालान
जून 582
जुलाई 5929
अगस्त 2585
सितंबर 1307
अक्तूबर 1675
नवंबर 2279
दिसंबर 4597
जनवरी 2578
फरवरी 1139