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सवा साल बाद पंजाब विधानसभा पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू, पिछली कतार में बैठे आए नजर

Tue, 20 Oct 2020 01:29 AM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब विधानसभा पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : @capt_amarinder
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कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू करीब सवा साल के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदन में दिखाई दिए। सदन की पूरी कार्यवाही के दौरान वे शांत भाव से मंत्रियों की सीटों के पीछे वाली कतार में बैठे रहे। पिछले साल 10 जून को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से नवजोत सिद्धू अब तक न तो राजनीतिक गतिविधि और न ही विधानसभा सत्रों में ही शामिल हुए। 

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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ लंबे समय तक चले मनमुटाव के बाद उन्होंने कैबिनेट छोड़ दी थी। इस अवधि में वे मीडिया से भी दूर रहे और उन्होंने कभी कोई सियासी बयान भी जारी नहीं किया। हालांकि कांग्रेस पार्टी और राज्य कांग्रेस में उनकी भूमिका को लेकर लगातार कयास लगाए जाते रहे। 

बीते सवा साल के दौरान नवजोत सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन अवसर पर ही नजर आए थे, जब उन्होंने कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ श्री करतारपुर साहिब की यात्रा की। उस समय भी वे मीडिया से दूर रहे और राजनीति को लेकर उन्होंने मुंह नहीं खोला। 

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हाल ही में कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश रावत से उनकी मुलाकात चर्चा में रही। वे बीते दिनों अमृतसर में किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ सिद्धू रोष मार्च निकाला और राहुल गांधी की मोगा रैली में भी सक्रिय रहे। मध्य प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस ने सिद्धू को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है। इससे यह साफ हो गया है कि कांग्रेस आलाकमान नवजोत सिद्धू को एक बार फिर राजनीति में सक्रियता से वापस ला रही है। 

परमिंदर ढींढसा और सुखपाल खैरा साथ-साथ
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद अकाली दल के बागी विधायक परमिंदर सिंह ढींढसा और आम आदमी पार्टी के निलंबित विधायक सुखपाल सिंह खैरा दोनों ही एक कार में सवार होकर विधानसभा परिसर से निकले तो सियासी हलकों में नई सुगबुगाहट शुरू हो गई। परमिंदर ढींढसा के पिता सुखदेव सिंह ढींढसा ने हाल ही में अकाली दल से नाता तोड़कर अकाली दल डेमोक्रेटिक का गठन किया है। वहीं सुखपाल खैरा आप से अलग होने के बाद पंजाब एकता पार्टी का गठन कर चुके हैं। 

अकाली दल टकसाली से गठबंधन न होने के बाद ढींढसा जहां अपनी पार्टी के लिए सक्रिय सियासी नेताओं को जोड़ने की मुहिम चला रहे हैं, वहीं पंजाब डेमोक्रेटिक अलाइंस से जुड़कर भी खैरा अपनी पार्टी को अब तक सक्रिय नहीं कर सके हैं। परमिंदर ढींढसा ने भले ही अकाली दल से नाता नहीं तोड़ा है लेकिन वे अपने पिता की पार्टी के लिए इन दिनों सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सोमवार को सुखपाल खैरा के साथ परमिंदर ढींढसा की निकटता के कई मायने लगाए जा रहे हैं।
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