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'मास्टरस्ट्रोक' खेलने के बाद क्या बोले सिद्धू, क्यों उभरा 3 साल पुराना दर्द?

Tue, 26 Jul 2016 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नवजोत सिद्धू - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले सिद्धू का ये मास्टरस्ट्रोक माना जाएगा, इसकी नींव 3 साल पहले पढ़ चुकी थी। 
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इस्तीफा पंजाब के हित में 
सिद्धू ने भी स्वीकार किया है कि आप में शामिल होने को लेकर बातचीत चल रही है। आप ने भी इस्तीफे को साहसिक कदम बताते हुए सिद्धू के पार्टी में शामिल होने का खंडन नहीं किया है।
पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर राज्यसभा में जाने का फैसला किया था। उनके सामने सही या गलत में से एक को चुनने का विकल्प था। ऐसे में मैं तटस्थ नहीं रह सकता था। राज्यसभा की सदस्यता भी मैंने पंजाब के हित के लिए स्वीकार की थी और इस्तीफा भी पंजाब के हित में दिया है। 
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केजरीवाल से हुई कई दौर की बातचीत

नवजोत सिद्धू - फोटो : फाइल फोटो
आप सूत्रों के मुताबिक बीते 4-5 महीने में सिद्धू दंपति की दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से कई दौर की बातचीत हुई थी। इस क्रम में नवजोत कौर शुरू से ही आप में शामिल होने की इच्छुक थीं। मगर इसी बीच भाजपा नेतृत्व ने सिद्धू को मना लिया। इस क्रम में खुद प्रधानमंत्री मोदी ने सिद्धू से बातचीत की और उन्हें राज्यसभा में आने के लिए राजी कर लिया। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि सिद्धू पंजाब में आप का मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे या नहीं।

क्यों नाराज थे सिद्धू
भाजपा पंजाब में अपनी सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक अकाली दल का दामन नहीं छोड़ना चाहती थी, जबकि सिद्धू दंपति की अकाली दल के साथ छत्तीस का आंकड़ा था। खासतौर से राज्य में ड्रग तस्करी, अमृतसर में सांसद रहने के दौरान राज्य सरकार से सहयोग न मिलने और अंत में खुद का टिकट काट कर वित्त मंत्री अरुण जेटली को चुनाव मैदान में उतारे जाने से सिद्धू काफी खफा थे। भाजपा के लिए चिंता की बात यह है कि सिद्धू न सिर्फ पार्टी के स्टार प्रचारक थे, बल्कि पार्टी के एकमात्र दमदार और बेदाग सिख चेहरा भी थे।

कोट
सिद्धू का भाजपा छोड़ना एक साहसिक कदम है। हालांकि अभी सिद्धू को पार्टी में शामिल करने का आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। मगर पार्टी की लंबे समय से इच्छा थी कि सिद्धू पार्टी में आएं। सिद्धू बेदाग छवि के अच्छे वक्ता और लोकप्रिय नेता हैं। पार्टी में आने पर उनका स्वागत है। - भगवंत मान, सांसद, आप
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3 साल पहले पढ़ चुकी थी नींव

नवजोत सिद्धू पत्नी नवजोत कौर सिद्धू के साथ - फोटो : फाइल फोटो
सितंबर 2013: सिद्धू ने बादल परिवार के खिलाफ मोर्चा खोला। अपनी संसदीय सीट अमृतसर के विकास में भेदभाव का आरोप लगाया

मार्च 2014: लोक सभा चुनाव में सिद्धू का टिकट कटा, अमृतसर से अरुण जेटली भाजपा के उम्मीदवार। सिद्धू प्रचार से दूर रहे

अक्तूबर 2014: सिद्धू ने पार्टी के लिए हरियाणा में प्रचार किया. बादलों पर निशाना

दिसंबर 2014: जम्मू में चुनाव प्रचार के दौरान सिद्धू पर दो बार हमला, सिद्धू ने हमले के पीछे बादलों का हाथ बताया

दिसंबर 2015: केजरीवाल ने पहली बार सिद्धू की तारीफ की,  ईमानदार नेता बताया, कहा पार्टी में स्वागत

एक अप्रैल 2016: सिद्धू की पत्नी डॉक्टर नवजोत कौर ने अपनी फेसबुक वॉल पर मुख्य संसदीय सचिव पद से इस्तीफा देने की बात लिखी..बादल सरकार को कोसा..फिर यू टर्न ले लिया

अप्रैल 2016: सिद्धू राज्य सभा के किए मनोनीत

जून 2016: सिद्धू को पंजाब भाजपा कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया। वो एक भी बैठक में नहीं आए। पत्नी ने बयान दिया कि जब तक भाजपा अकाली दल से नाता नहीं तोड़ती तब तक सिद्धू बैठक में नहीं आएंगे। सिद्धू ने भाजपा नेताओं से संपर्क तोड़े, उनके फोन रिसीव करने बंद किए

जुलाई 2016: सिद्धू का राज्य सभा से इस्तीफा
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