आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेता योगेंद्र यादव सोमवार को अमर उजाला चंडीगढ़ के कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने निजी जीवन पर पूछे गए सवालों पर भी बेबाकी से बात की।
इस दौरान उनसे जब पूछा गया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के समय उनके सलीम नाम के कारण उन्हें आप का मुस्लिम चेहरा बनाने की चर्चा जोरों पर थी, तो उन्होंने बताया कि यह सिर्फ अफवाह है। वह हिंदू परिवार से संबंध रखते हैं।
आप नेता से यह पूछे जाने पर कि उन्हें किस नाम से जाना जाए, सलीम या योगेंद्र, तो उन्होंने बचपन की यादें साझा करते हुए सलीम और योगेंद्र में समानता वाली बातों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि क्यों आज भी उनके परिवार के लोग और करीबी दोस्त उन्हें सलीम नाम से बुलाते हैं।
जानिए क्या कहा, 'सलीम' यानि योंगेंद्र यादव ने
सलीम यानि योंगेंद्र यादव ने बताया, ‘दरअसल, मेरा जन्म हिंदू परिवार में हुआ है, लेकिन नाम सलीम रखा गया। मेरे दादा स्कूल में हेडमास्टर थे। बात 1936 की है जब एक दिन मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ स्कूल पहुंची और बच्चों को उनके हवाले करने की मांग की। दादा जी ने मना कर दिया तो दंगाइयों ने गंडासे से उन्हें काट डाला।
यह सब मेरे पिता जी के सामने हुआ, जो उस समय महज सात साल के थे। उनके मन पर इस घटना का असर इतना गहरा हुआ कि शादी के बाद उन्होंने अपने बच्चों के मुस्लिम नाम रखने का निर्णय लिया। जब मैं पैदा हुआ तो मेरा नाम सलीम रखा गया। यहां तक कि स्कूली दस्तावेजों में भी मेरा यही नाम था लेकिन मेरी कक्षा में बाकी सब बच्चे इस नाम को लेकर अक्सर चिढ़ाते थे।
इससे मैं इतना परेशान हुआ कि मैंने माता-पिता से कहा कि या मेरा नाम बदल दीजिए या फिर मैं स्कूल नहीं जाऊंगा। उस समय मैं पांच साल का था। पिता जी ने मेरे सामने कुछ पर्चियां रखीं और उनमें से कोई एक पर्ची उठाने को कहा। मैंने जो पर्ची उठाई, उस पर ‘योगेंद्र’ लिखा था।
बस, फिर मैं सलीम से योगेंद्र हो गया। ये बात सच है कि आज भी मेरे परिवार के लोग और करीबी दोस्त मुझे सलीम नाम से ही बुलाते हैं। इसलिए यह नाम मुझे हमेशा अपनेपन का एहसास दिलाता है।’’